वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को मोदी 3.0 का पहला बजट पेश करने जा रही हैं. मोदी 3.0 से कारोबारियों और अन्य सेक्टरों के लोगों को खासी उम्मीदें हैं. हालांकि, सभी की उम्मीदों में एक बात समान है कि सभी अपने सेक्टर के बुनियादी ढांचे की मजबूती जरूर चाहते हैं. शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस बार गवर्नमेंट को शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों के बीच की खाई को पाटने के लिए भी विशेष योजनाओं की जरूरत है. स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों और नागरिकों को आशा है कि गवर्नमेंट इस बजट में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, अधिक अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाएगी. इसके साथ ही महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है. स्टार्टअप्स, रिन्यूएबल एनर्जी और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बजट से खासी उम्मीदें हैं. आइए जानते हैं कि विभिन्न क्षेत्र की क्या-क्या प्रमुख अपेक्षाएं हैं और ये बजट 2024 से किस प्रकार की उम्मीदें लगाए हुए हैं.हेल्थ सेक्टर को क्या हैं उम्मीदें
यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चेयरमैन डाक्टर पी एन अरोड़ा ने कहा, ‘बजट युवाओं, किसानों और देश के लिए जरूरी दिशा प्रदान करता है. मैं पीएम और वित्त मंत्री से आनें वाले बजट में हिंदुस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने की अहमियत की अपील करता हूं. आयुष्मान हिंदुस्तान और व्यापक बीमा कवरेज के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच चाहिए.‘
रिन्यूएबल एनर्जी को मिले बढ़ावा
इंफॉर्मा मार्केट्स इण्डिया के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रास का बोलना है कि गवर्नमेंट ने 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ पर जाने का वायदा किया है. हम उत्साही हैं कि नवीकरण क्षेत्र में विभिन्न तरीकों जैसे पवन ऊर्जा और कोयले की गैसीकरण के लिए वित्तीय सहायता से जरूरी प्रगति होगी. हमने सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सरकारी पहल की सराहना की है.
शिक्षा बजट को बढ़ाने की मांग
क्रैक एकेडमी के फाउंडर और सीईओ नीरज कंसल का बोलना है कि राष्ट्र को शिक्षा में वैश्विक स्तर पर सुधार लाने के लिए मानव संसाधनों में निवेश और पूंजी व्यय को एकसाथ लाने की जरूरत है. आनें वाले केंद्रीय बजट 2024-25 में हमें आशा है कि गवर्नमेंट शिक्षा बजट को 13% से अधिक बढ़ाएगी, जिससे शैक्षिक ढांचा मजबूत होगा. इसके साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच योगदान के लिए वित्तीय सहायता को भी अहमियत देनी चाहिए. वहीं, डीपीएस इंदिरापुरम की प्रिंसिपल प्रिया जॉन का बोलना है कि यदि आर्थिक परिस्थितियाँ अनुकूल रहती हैं और गवर्नमेंट शिक्षा को अहमियत देती है, तो हम 13% से अधिक की वृद्धि देख सकते हैं. यह शिक्षा के क्षेत्र में लगातार समर्थन और शैक्षिक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत को दर्शाता है. इससे विद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीकी एकीकरण और जरूरी कार्यक्रमों के लिए विभागानुसार धन का व्यवस्था करना संभव होगा.
र्स्टाटअप्स को भी है बेहतरी की उम्मीद
अर्दीट्वीन्स के सीईओ निशांत कुमार के अनुसार, स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाने के लिए बेहतर नीति बनाए जाने की आशा है. सस्टेनेबल फैशन उद्योग के लिए हमें 2024-25 के केंद्रीय बजट में वित्तीय सहायता की आशा है. हम उत्सुक हैं कि गवर्नमेंट वैश्विक परिधान कचरे के विरुद्ध रीसाइक्लिंग और जैविक कपड़ों के लिए नीतिगत पहल लाएगी, जो हमारे उद्योग के विकास और ‘मेड इन इंडिया’ लेबल को समर्थन देगी.
रियल एस्टेट सेक्टर बोला, इंडस्ट्री बने तो बढ़ेगा रोजगार
गुलशन ग्रुप के डायरेक्टर दीपक कपूर का बोलना है कि नीति आयोग के मुताबिक भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर 2030 तक 1 ट्रिलियन $ बाजार आकार तक पहुंचने का अनुमान है. रियल एस्टेट सेक्टर आनें वाले बजट में अनुकूल तरीकों की आशा कर रहा है. स्टील, सीमेंट और ईंधन की इनपुट लागत को कम करना जरूरी है. सीमेंट पर वर्तमान में 28% GST को कम किया जाना चाहिए. इसके अतिरिक्त, किफायती आवास को बढ़ावा देने और देश के आवास उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कर प्रोत्साहन देने की जरूरत है. स्पेक्ट्रम मेट्रो के वाईस प्रेजिडेंट सेल्स एंड मार्केटिंग अजेंद्र सिंह केंद्रीय बजट 2024-25 से पहले, कमर्शियल रियल्टी आशा कर रहा है कि सरकारी नीतियां उद्यमिता को बढ़ावा देने के लक्ष्यों के साथ मेल खाएंगी. एक मुख्य मांग है कि कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट मौजूद हो. सीमेंट पर 28% GST, जो एक प्रमुख उपभोग्य वस्तु है, इसकी कुल लागत का लगभग एक तिहाई है, जो एक जरूरी चिंता का विषय है. इसलिए, स्टील, सीमेंट और ईंधन पर जीएसटी कम करना, साथ ही सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करना, इस सेक्टर को बढ़ावा देगा.
रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा दिया जाए
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर, अमित मोदी का बोलना है कि रियल एस्टेट सेक्टर राष्ट्र में कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के मजदूरों का बड़ा रोजगार जनरेटर है. हालांकि, आनें वाले बजट से पहले, कुछ मामले हैं जिन पर हम गवर्नमेंट से ध्यान देने का निवेदन करते हैं. सबसे प्रमुख मांगों में से एक है कि इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिया जाए जिससे कंज़्यूमरों को फायदा मिलेगा, परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा और लागत कम करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस लागू किया जा सके. हमें विश्वास है कि ये कदम क्षेत्र की प्रगति को गति देंगे. मिगसन ग्रुप के एमडी, यश मिगलानी का बोलना है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि को बढ़ाने में जरूरी किरदार निभाता है. यह जीडीपी में 8% का सहयोग करता है और राष्ट्र में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है. केंद्रीय बजट 2024-25 के संदर्भ में, इस क्षेत्र की प्रमुख अपेक्षाओं में उद्योग का दर्जा दिया जाना और सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को लागू करना शामिल है. इसके अलावा, सीमेंट पर 28% GST है, जो कुल सीमेंट लागत का लगभग एक तिहाई है और एक बड़ी चिंता है.