पेरिस, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने बोला कि यूरोप को यूक्रेन का समर्थन जारी रखना चाहिए साथ ही उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यूक्रेन पर कोई तानाशाही शांति नहीं थोपी जा सकती. उन्होंने बोला कि यूक्रेन को यह भरोसा होना चाहिए कि यूरोप उसके साथ खड़ा है और उसकी सहायता करता रहेगा.
स्कोल्ज़ ने यह बयान एक इमरजेंसी बैठक के बाद दिया, जिसे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने बुलाया था. यह बैठक रूस और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ता से पहले हुई, जिसमें यूरोपीय राष्ट्रों ने अपनी रणनीति पर चर्चा की. स्कोल्ज़ ने बोला कि यूक्रेन किसी भी ऐसी शांति को स्वीकार नहीं कर सकता जो जबरदस्ती थोपी जाए.
जर्मन चांसलर ने यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका से सामूहिक सुरक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का आग्रह किया और बोला कि नाटो की ताकत इसी में है कि सभी राष्ट्र मिलकर काम करें और जोखिम साझा करें. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस एकता पर कोई प्रश्न नहीं उठना चाहिए.
जब उनसे पूछा गया कि क्या यूरोपीय राष्ट्र शांति मिशन के अनुसार यूक्रेन में जमीनी सेना भेज सकते हैं, तो स्कोल्ज ने इसे “समय से पहले” कहा और बोला कि इस पर अभी चर्चा करना ठीक नहीं होगा. हालांकि, उन्होंने यह जरूर बोला कि यूरोपीय राष्ट्र अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम दो फीसदी रक्षा बजट पर खर्च करने के लिए तैयार हैं.
इसके अलावा, जर्मनी इस बात का समर्थन करता है कि यदि यूरोपीय राष्ट्र अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करते हैं, तो इस खर्च को उनके बजट घाटे की गणना में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.
इस बैठक में नाटो और यूरोपीय कमीशन के नेताओं के साथ-साथ फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, पोलैंड, स्पेन, इटली, डेनमार्क और नीदरलैंड सहित कई यूरोपीय राष्ट्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इसका मुख्य उद्देश्य रूस और अमेरिका की वार्ता से पहले एक साझा यूरोपीय प्रतिक्रिया तैयार करना था. हालांकि, इस वार्ता में न तो ब्रुसेल्स को और न ही कीव को आमंत्रित किया गया है.