प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम को राष्ट्रीय राजधानी में कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भाग लेंगे. प्रधान मंत्री कार्यालय के एक बयान में इस बात की जानकारी दी है. इस अवसर पर पीएम जनसमूह को भी संबोधित करेंगे. कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव का तीसरा संस्करण शुक्रवार से रविवार तक आयोजित किया जाएगा. इस साल का सम्मेलन हरित बदलाव के वित्तपोषण, भू-आर्थिक विखंडन और विकास के लिए निहितार्थ, लचीलापन बनाए रखने के लिए नीतिगत कार्रवाई के सिद्धांतों जैसे विषयों पर केंद्रित होगा.
भारतीय और तरराष्ट्रीय विद्वान और नीति निर्माता भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक दक्षिण की अर्थव्यवस्थाओं के सामने आने वाले कुछ सबसे जरूरी मुद्दों पर चर्चा करेंगे. कॉन्क्लेव में पूरे विश्व से वक्ता हिस्सा लेंगे. कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव का आयोजन वित्त मंत्रालय के साथ साझेदारी में इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ द्वारा किया जा रहा है. कॉन्क्लेव के वक्ताओं में केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री, निर्मला सीतारमण (उद्घाटन सत्र) और केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (समापन सत्र) भी शामिल होंगे.
इस साल का सम्मेलन कई विषयों पर केंद्रित होगा, जिसमें तरराष्ट्रीय वित्तीय वास्तुकला में सुधार, हरित संक्रमण का वित्तपोषण, भू-आर्थिक विखंडन और विकास के लिए निहितार्थ, हिंदुस्तान और मध्यम आय का जाल, नौकरियां और कौशल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सार्वजनिक नीति डिजाइन, और लचीलापन बनाए रखने के लिए नीतिगत कार्रवाई के सिद्धांत शामिल हैं. यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण में राष्ट्रों के बीच पुल-निर्माता के रूप में हिंदुस्तान की बढ़ती किरदार को प्रदर्शित करेगा. समावेशी विकास, उत्तरदायी डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाने और वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हिंदुस्तान की प्रतिबद्धता 2047 तक एक विकसित देश बनने की उसकी आकांक्षा को रेखांकित करती है, जिसे कई लोग ‘द भारतीय एरा’ कह रहे हैं.