राष्ट्रपति पद पर दोबारा लौटने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस पार्टी के संयुक्त सत्र में दिये गये अपने पहले संबोधन में कई बड़े घोषणा तो किये ही हैं साथ ही अपने कई हालिया फैसलों के लिए हो रही उनकी आलोचनाओं का भी करारा उत्तर दे दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह टैरिफ युद्ध को अमेरिका के लिए लाभ वाला बताया, जिस तरह एलन मस्क की ओर से गैर-जरूरी कर्मचारियों को सरकारी जॉब से हटाये जाने को ठीक ठहराया, जिस तरह अपनी विस्तारवादी नीति को ठीक ठहराया वह दर्शाता है कि ट्रंप जो बातें ठान कर व्हाइट हाउस में आये थे उसे वह पूरा करके ही दम लेंगे. ट्रंप ने अपने संबोधन में आव्रजन, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा की दिशा में उठाए गए कदमों पर चर्चा की.
हम आपको बता दें कि ट्रंप ने जब यह बोला कि उनके हालिया फैसलों की वजह से ‘अमेरिका वापस आ गया है’ और अमेरिका का विश्वास और सम्मान लौटा है तो इसके विरोध में कुछ डेमोक्रेट बाहर चले गए. 100 मिनट का यह भाषण आधुनिक अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति की ओर से कांग्रेस पार्टी में दिया गया सबसे लंबा भाषण था. इस भाषण को केवल अमेरिकी कांग्रेस पार्टी में बैठे नेता ही नहीं सुन रहे थे बल्कि विश्व नेता भी ट्रंप के भाषण पर करीब से नजर रख रहे थे.
ट्रंप ने अपने भाषण के सिर्फ़ कुछ मिनट ही विदेश नीति को समर्पित किये और अर्थव्यवस्था से जुड़े बिंदुओं को गहराई से छुआ. ट्रंप ने साफ बोला कि शुल्क अमेरिका को फिर से अमीर और महान बनाने के लिए हैं. ट्रंप ने संघीय बजट को संतुलित करने की कसम खाई, यहां तक कि उन्होंने सांसदों से एक व्यापक कर कटौती एजेंडा लागू करने का आग्रह भी किया. हम आपको बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस पार्टी को इस वर्ष के अंत में राष्ट्र की कर्ज सीमा बढ़ाने की आवश्यकता है या फिर विध्वंसक डिफ़ॉल्ट का जोखिम उठाना होगा. ट्रंप ने बार-बार अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन पर विभिन्न फैसलों को लेकर धावा भी किया. राष्ट्रपति ने साथ ही अरबपति व्यवसायी एलन मस्क और उनके सरकारी दक्षता विभाग की प्रशंसा की, जिन्होंने 100,000 से अधिक संघीय कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है, अरबों $ की विदेशी सहायता में कटौती की है और कई एजेंसियों को बंद कर दिया है. राष्ट्रपति ने मस्क को “सैंकड़ों अरब $ की धोखाधड़ी” की पहचान करने का श्रेय भी दिया. गैलरी में बैठे मस्क को रिपब्लिकन से भी सराहना मिली.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस पार्टी से 4.5 ट्रिलियन $ की व्यापक योजना पारित करने का आह्वान किया, जो उनके 2017 के कर कटौती का विस्तार करेगी, सीमा सुरक्षा कड़ी करेगी और बड़े पैमाने पर निर्वासन के काम के लिए निधि देगी. ट्रंप ने बोला कि पिछले महीने गैरकानूनी रूप से सीमा पार करने की घटनाएं अब तक की सबसे कम रहीं क्योंकि उनका प्रशासन इस परेशानी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठा रहा है.
इसके साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंदुस्तान और चीन सहित अन्य राष्ट्रों द्वारा उच्च शुल्क लगाए जाने की आलोचना करते हुए इसे ‘‘बेहद अनुचित’’ करार दिया है. ट्रंप ने साथ ही घोषणा की है कि अगले महीने से जवाबी शुल्क लगाए जाएंगे. ट्रंप ने मंगलवार रात अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अन्य राष्ट्रों ने दशकों से हमारे विरुद्ध शुल्क लगाए हैं और अब हमारी बारी है कि हम उन राष्ट्रों के विरुद्ध इसका इस्तेमाल करें.” उन्होंने बोला कि यूरोपीय संघ (ईयू), चीन, ब्राजील, भारत, मेक्सिको और कनाडा क्या आपने उनके बारे में सुना है. ऐसे अनेक राष्ट्र हैं जो हमारी तुलना में हमसे बहुत अधिक शुल्क वसूलते हैं. यह एकदम अनुचित है. राष्ट्रपति ने जवाबी शुल्क को लेकर अपना पक्ष रखा और बोला कि ये दो अप्रैल से लगाए जाएंगे. अमेरिकी कांग्रेस पार्टी को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘हमारे उत्पादों पर चीन का औसत शुल्क दोगुना है… और दक्षिण कोरिया का औसत शुल्क चार गुना अधिक है. जरा सोचिए, चार गुना अधिक और हम दक्षिण कोरिया को सैन्य रूप से तथा कई अन्य उपायों से इतनी सहायता देते हैं. लेकिन यही होता है. यह दोस्त और शत्रु दोनों की तरफ से हो रहा है. यह प्रणाली अमेरिका के लिए उचित नहीं है.”
‘व्हाइट हाउस’ में अपने दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी को पहली बार संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत हमसे 100 फीसदी से अधिक ऑटो शुल्क वसूलता है.’’ उन्होंने बोला कि हम भी उत्तर में वैसे ही शुल्क लगाएंगे. हम आपको याद दिला दें कि फरवरी में राष्ट्रपति ट्रंप ने बोला था कि उनका प्रशासन ‘‘जल्द’’ हिंदुस्तान और चीन जैसे राष्ट्रों पर जवाबी शुल्क लगाएगा, उन्होंने पिछले महीने पीएम नरेन्द्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान भी यह बात कही थी. हम आपको बता दें कि ट्रंप ने पीएम मोदी को यह साफ कर दिया है कि हिंदुस्तान को अमेरिका के जवाबी शुल्क से नहीं बख्शा जाएगा. ट्रंप ने इस बात पर बल दिया है कि शुल्क संरचना पर कोई भी उनसे बहस नहीं कर सकता.
उन्होंने यूक्रेन के साथ खनिज सौदे को आगे बढ़ाने की ख़्वाहिश का संकेत भी दिया. ट्रंप ने कहा, “साथ ही, हमने रूस के साथ गंभीर चर्चा की है और हमें मजबूत संकेत मिले हैं कि वे शांति के लिए तैयार हैं.” उन्होंने बोला कि उन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से एक अहम पत्र मिला है जिसके अनुसार उनका राष्ट्र शांति के लिए तैयार है. उन्होंने बोला कि यह अच्छी बात है. ग्रीनलैंड के मामले पर ट्रंप ने बोला कि हम इसे हर हाल में हासिल करके रहेंगे. वहीं उन्होंने मध्य पूर्व में शांति लाने और अब्राहम समझौते का विस्तार करने के अपने वादों को दोहराया है.
बहरहाल, देखना होगा कि अमेरिका की ओर से लगाये जाने वाले टैरिफ पर हिंदुस्तान का क्या रुख रहता है. वैसे हम आपको यह बता दें कि चीन ने ट्रंप द्वारा उसके निर्यात पर दूसरे दौर का 10 फीसदी शुल्क लगाने के उत्तर में अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त 15 फीसदी शुल्क लगा दिया है. चीन ने इसके साथ ही विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अमेरिका के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी प्रारम्भ कर दी है. हालांकि, चीन ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने के लिए वार्ता के लिए दरवाजे खुले रखे हैं.
दूसरी ओर, जानकारों ने राय जताई है कि अमेरिका द्वारा चीन, मेक्सिको और कनाडा पर उच्च शुल्क लगाए जाने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपना निर्यात बढ़ाने में सहायता मिलने की आशा है. जानकारों ने बोला है कि जिन क्षेत्रों को फायदा हो सकता है उनमें कृषि, इंजीनियरिंग, मशीन उपकरण, परिधान, कपड़ा, रसायन और चमड़ा शामिल हैं. जानकारों का बोलना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाया था, तो हिंदुस्तान चौथा सबसे बड़ा लाभ पाने वाले था.