इजरायल-हमास के बीच पिछले 10 महीने से चल रहे युद्ध के बीच संघर्ष विराम कराने की कोशिशें भी जारी हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 10 महीनों के अंदर नौवीं बार मिडिल-ईस्ट के दौरे पर हैं. उनकी यात्रा से पहले ब्रिटेन और फ्रांस के विदेश मंत्रियों ने भी शुक्रवार को इजरायल का दौरा किया और वहां के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ताकि सीजफायर के समझौते के लिए अंतर्राष्ट्रीय दवाब बनाया जा सके लेकिन इन दोनों विदेश मंत्रियों के दौरे पर बवाल मच गया है.दरअसल, हुआ ये कि ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी और उनके फ्रांसीसी समकक्ष स्टीफन सेजॉर्न ने शुक्रवार को इजरायली विदेश मंत्री इजरायल कैट्ज से मुलाकात की और सीज फायर समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की. इस दौरान ब्रिटिश और फ्रांसीसी विदेश मंत्रियों ने पीले रंग की सोलिडरिटी पिन अपने लैपल पर लगा रखी थी. ये पिन इजरायली बंधकों के साथ उनकी एकजुटता को दिखाता है लेकिन जब दोनों विदेश मंत्री फिलिस्तीनी पीएम मोहम्मद मुस्तफा से मुलाकात से मुलाकात करने रामल्लाह पहुंचे तो उन्होंने अपने लैपल से वह प्रतीक चिह्न हटा दिया. ब्रिटिश और फ्रांसीसी विदेश मंत्रियों की इस हरकत पर इजरायल आगबबूला हो उठा है.ब्रिटिश अखबार मेल ऑन संडे ने इजरायल गवर्नमेंट के पूर्व प्रवक्ता एयलॉन लेवी के हवाले से लिखा कि यदि इन दोनों मंत्रियों ने फिलिस्तीनी पीएम के सामने सोलिडरिटी पिन यानी प्रतीक चिह्न पहना होता तो उन्हें साफ संदेश जाता कि ये दोनों राष्ट्र भी इजरायली बंधकों के समर्थन में हैं और तब हमास को उन बंधकों की रिहाई तुरंत करने पर विचार करना पड़ता.
कई इज़रायली मीडिया की रिपोर्ट्स में यह भी बोला गया है कि पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी से मिलने से इनकार कर दिया. इजरायल इस बात से भी ब्रिटेन से नाराज है कि नयी ब्रिटिश गवर्नमेंट ने नेतन्याहू और उनके रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ़ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के तरराष्ट्रीय आपराधिक कोर्ट के प्रस्तावित प्रस्ताव पर विरोध वापस लेने का निर्णय किया है. चैनल 13 न्यूज़ और टाइम्स ऑफ़ इज़रायल के अनुसार, ब्रिटिश गवर्नमेंट ने लैमी और नेतन्याहू की मुलाकात के लिए इजरायल गवर्नमेंट से कई बार निवेदन किए, लेकिन नेतन्याहू ने मिलने से इनकार कर दिया.
हालांकि, एक ब्रिटिश बेवसाइट मिडिल ईस्ट आई ने विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि डेविड लैमी और बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात की कोई योजना थी ही नहीं. बता दें कि फ्रांस और ब्रिटेन ने हमास के विरुद्ध जंग में अमेरिका की ही तरह इजरायल का साथ दिया था और हथियारों से लेकर कई स्तर पर इजरायल को सहायता पहुंचाई थी. ब्रिटिश फौज ने तो समंदर में युद्धपोत उतारकर इजरायल को सांकेतिक सुरक्ष कवच भी उपलब्ध कराया था.