मुंबई के पूर्व विधायक, महाराष्ट्र गवर्नमेंट के पूर्व मंत्री, अजित पवार गुट की पार्टी एनसीपी के नेता जिनकी बांद्रा में गोली मारकर मर्डर कर दी जाती है. बाबा सिद्दीकी हत्या मुकदमा में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने हत्या की जिम्मेदारी ली है. घटना के 10 घंटे बाद फेसबुक पर एक पोस्ट किया गया और इस हमले की जिम्मेदारी ली गई. इस पोस्ट में लिखा गया है कि सलमान खान और दाऊद इब्राहिम का जो भी साथ देगा उनसे हम बदला लेंगे. उन्हें मृत्यु के घाट उतारेंगे. देखते ही देखते मीडिया में बिश्नोई गैंग को लेकर सनसनीखेज कहानियां तैरने लगी. कहा जा रहा है कि बिश्नोई से मुंबई पुलिस पूछताछ कर सकती है. वर्तमान में लॉरेंस गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती सेंट्रल कारावास में बंद है. इस वर्ष अप्रैल में सलमान खान के आवास पर गोलीबारी की घटना में उसकी कथित संलिप्तता सामने आने के बाद, मुंबई पुलिस ने कई आवेदन दाखिल किए लेकिन कुख्यात गैंगस्टर को हिरासत में लेने में सफल नहीं हो सकी. मुख्य कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक आदेश है, जो बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती कारावास से स्थानांतरित करने पर रोक लगाता है.
क्या है वजह
अगस्त 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गतिविधियों पर प्रतिबंध को बढ़ा दिया था. ये फैसला लॉरेंस बिश्नोई के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए लिया गया था. ये प्रतिबंध अगस्त 2025 तक लागू रहेगा. 2023 की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 303 (सीआरपीसी की धारा 268) के प्रावधानों के मुताबिक इसे लगाया गया है.
क्या कहती है धारा 303?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस को हिंदुस्तान में मौजूदा आपराधिक कानून ढांचे को आधुनिक बनाने और अपडेट करने के लिए पेश किया गया है. नए कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य कानून प्रबंध को और अधिक सशक्त करना है. बीएनएसएस की धारा 303 के अनुसार गवर्नमेंट को ये अधिकार है कि वो सुरक्षा औऱ सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए किसी कैदी की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सके. ये धारा सीआरपीसी की पुरानी धारा 268 से मिलती जुलती है. इसके अनुसार कैदी को कारावास से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
जेल परिसर में ही पूछताछ
डीआइजी श्रीमाली के मुताबिक, यदि कोई पुलिस या एजेंसी उनसे पूछताछ करना चाहती है तो उन्हें न्यायिक आदेश देना होगा और उनके संबंध में कोई भी जांच कारावास परिसर में ही की जानी चाहिए. हमें हाल ही में ऐसा कोई निवेदन नहीं मिला है. जबकि गुजरात पुलिस के वरिष्ठ ऑफिसरों ने इस बात की पुष्टि या खंडन करने से इनकार कर दिया कि क्या बिश्नोई को कारावास में एक अलग सेल में रखा जा रहा. ऑफिसरों ने पुष्टि की कि वह अहमदाबाद में कारावास सुविधा में किसी अन्य विचाराधीन कैदी के अधिकारों का प्रयोग जारी रखा.