America Tariff war: चीन और अमेरिका की बीच ‘दुनिया का बॉस’ बनने की होड़ कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद सीन बदल गया है। अमेरिका की गद्दी पर बैठते ही डोनाल्ड ट्रंप हंटर पर हंटर चलाए जा रहे हैं। अमेरिका फर्स्ट की नीतियों पर काम कर रहे ट्रंप ने आते ही टैरिफ का ऐसा चाबुक चलाया कि मैक्सिको, कनाडा से लेकर चीन तक को हिला दिया है, टैरिफ का वार हिंदुस्तान से भी अछूता नहीं रहने वाला है। ट्रंप के इन फैसलों का असर केवल हिंदुस्तान और चीन पर ही नहीं होगा, बल्कि वो स्वयं अमेरिका भी इसके असर से स्वयं को बचा नहीं पाएगा। यानी टैरिफ के हंटर से भले चोट चीन को लगेगी, लेकिन दर्द अमेरिका को भी होगा।
अमेरिका और चीन की लड़ाई
अमेरिका और चीन के बीच दुनिया का बॉस बनने को लेकर होड़ नयी बात नहीं है। चीन अपनी महत्वाकांक्षी नीतियों की धौंस दिखाने से बाज नहीं आता तो अमेरिका शक्तिप्रदर्शन से पीछे नहीं हटता। अमेरिका में ट्रंप युग की वापसी के साथ ही चीन पर नकेल कसने की कोशिशें तेज हो गई है। इसलिए अमेरिका कई पाबंदियों से चीन की चाल धीमी करने की प्रयास करता है। कभी पाबंदियों के जरिए तो कभी टैरिफ के जरिए अमेरिका चीन के पंख कुतरने से पीछे नहीं हटता। हाल ही में AI के लिए इस्तेमाल होने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स को लेकर अमेरिका ने कठोर कानून बनाए ताकि चीन के लिए एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ना कठिन हो तो वहीं इकोनॉमी पर प्रहार करने के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ा दिया।
आंच तो अमेरिका पर भी आएगी
अमेरिकी राष्ट्रपति जैसे को तैसा वाली नीति पर काम कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ का घोषणा किया, यानी जो जितना टैक्स लगाएगा, उसपर उतना ही टैक्स वो भी लगाएंगे। यानी यदि हिंदुस्तान अमेरिका के कृषि उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाता है तो अमेरिका भी 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। लेकिन ट्रंप अपने फैसलों से स्वयं अमेरिका और अमेरिकी लोगों को भी परेशान कर रहे हैं। ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने की योजना का सबसे अधिक हानि अमेरिकी कंज़्यूमरों को भी होगा।
ट्रंप के निर्णय से अमेरिका का नुकसान
ग्लोबल बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भी अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। जिसके अनुसार ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने से अमेरिका के लोगों की कठिन बढ़ेगी। इंपोर् पर टैरिफ लागत बढ़ने से कंपनियां उसकी भरपाई कंज़्यूमरों पर ही डालेगी, यानी आने वाले दिनों में अमेरिका में मुद्रास्फीति में वृद्धि होगी। महंगाई बढ़ेगी तो इसका सीधा-सीधा हानि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को होने वाला है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रिपोर्ट की माने तो अमेरिका की विनिर्माण क्षमता और रोजगार बाजार पहले से ही दवाब में है। टैरिफ बढ़ने से उसका बोझ कंज़्यूमरों पर पड़ेगा। जिसकी वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, ग्लोबल ट्रेड की सप्लाई चेन प्रभावित होगी। अमेरिकी की जीडीपी को इसका हानि होगा। रिपोर्ट के अनुसार टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी पर्सनल उपभोग व्यय मुद्रास्फीति को 0.7 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ 1.2 प्रतिशत तक घट सकती है। यानी ट्रंप जो दर्द चीन और हिंदुस्तान को देना चाहते हैं उसका दर्द उन्हें स्वयं भी झेलना पड़ेगा।
भारत पर भी असर
ट्रंप के टैरिफ वार को लेकर भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बोला कि यदि अमेरिका 15-20 प्रतिशत की टैरिफ लगाता है तो हिंदुस्तान के निर्यात पर इसका कुल असर केवल 3-3.5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। टैरिफ के असर को कम करने के लिए हिंदुस्तान निर्यात विविधीकरण, मूल्य संवर्धन (Value Addition) और नए व्यापार मार्ग पर विचार कर इसके असल को कम कर सकता है। वहीं गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और हिंदुस्तान के बीच रेसिप्रोकल टैरिफ लगने की स्थिति में हिंदुस्तान की जीडीपी पर 0.1% से 0.3% तक का असर हो सकता है।