कोच्ची न्यूज़ डेस्क .. विपक्ष के नेता वी।डी। सतीशन ने गवर्नमेंट को घरेलू कंज़्यूमरों के लिए बिजली शुल्क बढ़ाकर जनता पर बोझ डालने के विरुद्ध आगाह किया है. स्थिति को स्वयं को हानि पहुंचाने वाला बताते हुए, श्री सतीशन ने एलडीएफ गवर्नमेंट के उस निर्णय को उत्तरदायी ठहराया, जिसमें उन्होंने 2014 में ओमन चांडी गवर्नमेंट द्वारा लिखित फायदेमंद बिजली खरीद समझौते को रद्द करने का निर्णय किया था, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि इससे केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) को भारी हानि हुआ है.चांडी गवर्नमेंट के समझौते के अनुसार, राज्य 25 सालों तक 4.29 रुपये प्रति यूनिट की रेट से बिजली खरीदेगा. राज्य को इस समझौते से नौ वर्ष तक फायदा मिला, जब तक कि पिनाराई विजयन गवर्नमेंट ने 2023 में बिना कोई कारण बताए अनुबंध रद्द नहीं कर दिया.श्री सतीशन ने बोला कि “अचानक” लिए गए इस निर्णय के कारण राज्य को 8 से 12 रुपये प्रति यूनिट के बीच की उच्च और बमुश्किल वहनीय रेट पर बिजली खरीदनी पड़ी, जिससे केएसईबी को रोजाना लगभग 15 करोड़ रुपये का हानि हुआ. उन्होंने दावा किया कि 2014 के समझौते को रद्द करने से अब तक सरकारी खजाने को लगभग 2000 करोड़ रुपये का हानि हुआ है. श्री सतीशन ने बोला कि गवर्नमेंट ने स्वयं को हुए हानि से उबारने के लिए 2024 में दो बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की है. बिजली के बढ़ते दाम, विक्रेताओं की अनियंत्रित महंगाई और गवर्नमेंट की विफल बाजार हस्तक्षेप नीतियों ने जीवन-यापन की लागत के संकट को और बढ़ा दिया है.
जनता के आक्रोश के बावजूद गवर्नमेंट ने 2014 के समझौते को बहाल करने में देरी की. नतीजतन, सरकार, जिसने स्वयं को कठिन में डाल लिया था, ने बिजली आपूर्तिकर्ताओं के साथ एक नया समझौता करने का कोशिश किया. कथित तौर पर अडानी समूह ने केएसईबी को 6.8 रुपये प्रति यूनिट की रेट से बिजली आपूर्ति करने का वादा किया है. श्री सतीशन ने सीएम कार्यालय पर निजी आपूर्तिकर्ताओं को उनके आर्थिक फायदा के लिए सौदे पर फिर से वार्ता करने में सहायता करने के लिए 2014 के बिजली खरीद समझौते को रद्द करने के लिए दबाव बनाने का इल्जाम लगाया. उन्होंने बोला कि गवर्नमेंट केरल राज्य विद्युत विनियामक आयोग को इस “आत्म-पराजयकारी” फैसला के लिए गुनेहगार ठहराकर सियासी कवर नहीं ले सकती. श्री सतीसन ने बोला कि आयोग के सदस्य वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के साथी यात्री थे. गौरतलब है कि आयोग के एक सदस्य ने पूर्व विद्युत मंत्री एम एम मणि, विधायक के निजी स्टाफ में काम किया था. उन्होंने कहा, “वे सिर्फ़ गवर्नमेंट के इशारे पर काम करेंगे.”