अहमदाबाद: हिंदुस्तान के प्रतिष्ठित उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार देर रात 86 साल की उम्र में मुंबई के एक हॉस्पिटल में मृत्यु हो गया. उनकी राष्ट्र और विदेश में उद्योग और समाज सेवा के क्षेत्र में अनूठी पहचान थी. उनके मृत्यु के बाद, कई राज्यों ने शोक व्यक्त किया और राजकीय शोक की घोषणा की है. पीएम मोदी सहित देश-विदेश की कई प्रमुख शख़्सियतों और आम लोगों ने भी उनके मृत्यु पर शोक जताया. महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने राज्य में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया है, जिसके अनुसार सभी सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और गुजरात गवर्नमेंट ने भी एक दिन के शोक की घोषणा की है.
पहले राजकीय शोक की घोषणा केंद्र गवर्नमेंट की राय पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती थी, लेकिन हाल ही में नियमों में परिवर्तन के बाद यह अधिकार राज्यों को दे दिया गया है. अब राज्य स्वयं तय करते हैं कि किसे राजकीय सम्मान दिया जाना चाहिए. राजकीय शोक का अर्थ होता है कि उस दिन सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहता है और किसी प्रकार के मनोरंजन कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाता. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उस दिन सार्वजनिक छुट्टी होगी. यह किसी प्रमुख आदमी के मृत्यु या किसी विशेष घटना के सम्मान में घोषित किया जाता है, जिससे लोग उस आदमी या घटना के महत्व को समझ सकें और एकत्रित होकर श्रद्धांजलि दे सकें.
रतन टाटा के मृत्यु पर महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने बोला कि रतन टाटा एक अनमोल रत्न थे, जिन्हें राष्ट्र ने खो दिया. उन्होंने उन्हें हिंदुस्तान का कोहिनूर कहा और बोला कि रतन टाटा के जाने से राष्ट्र और राज्य को बहुत हानि हुआ है. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी शोक व्यक्त करते हुए बोला कि रतन टाटा, जिन्होंने झारखंड जैसे पिछड़े राज्य को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, के मृत्यु पर राज्य में एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की गई है. रतन टाटा के योगदानों को याद करते हुए, उनके प्रति देशभर से सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है. उनका जीवन और कार्य राष्ट्र और समाज के लिए एक प्रेरणा बने रहेंगे.