भारत के पड़ोसी राष्ट्र श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकारी खर्चे को कम करने के लिए वहां के मंत्रियों और उप-मंत्रियों को नए गाइड लाइन जारी किए हैं। मंत्रियों के कर्मचारियों की संख्या, गाड़ियों के इस्तेमाल और दूसरे खर्चों की सीमा भी तय कर दी गई है। 21 जनवरी को जारी नए निर्देश की पूरे विश्व में चर्चा है।
घरवाले सहायक नहीं बनेंगे
राष्ट्रपति के सचिव एन।एस। कुमानायके ने कहा कि अब मंत्रियों को अधिक से अधिक 15 और उप-मंत्रियों को 12 सहायक कर्मचारियों को रखने की इजाजत दी गई है। इन कर्मचारियों को राज्य सेवा से भर्ती किया जाना चाहिए और इनमें परिवार के सदस्य या करीबी सम्बन्धी शामिल नहीं हो सकते।
राष्ट्रपति सचिवालय ने गाड़ियों के उपयोग, ईंधन और टेलीफोन खर्चों के संबंध में भी साफ निर्देश दिया है। मंत्रियों और उप-मंत्रियों को अधिकतम दो वाहन रखने की इजाजत दी गई है। यदि वे सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं या निजी संस्थाओं से वाहन किराए पर लेते हैं तो मंत्रालय सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ये नए नियम इस वर्ष 6 जनवरी से कारगर हो गए हैं। दिसानायके ने इस बात पर बल दिया कि नए नियमों का उद्देश्य सरकारी खर्चों में कटौती करना है।
पिछले वर्ष सत्ता में आने के तुरंत बाद, नयी गवर्नमेंट ने घोषणा की थी कि प्रत्येक श्रीलंकाई सांसद को इस्तेमाल के लिए कम ईंधन खपत वाले वाहन प्रदान किए जाएंगे। सार्वजनिक सुरक्षा और संसदीय मामलों के मंत्री आनंद विजेपाला ने पिछले वर्ष नवंबर में बोला था कि सांसद अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन वे लग्जरी वाहनों के हकदार नहीं होंगे।
उन्होंने कहा, ‘हमने यह फैसला यह सुनिश्चित करने के लिए लिया है कि कर के पैसे का उचित इस्तेमाल किया जाए।‘ श्रीलंका ने पहले प्रत्येक सांसद को शुल्क का भुगतान किए बिना गाड़ी खरीदने और उसका मालिक बनने का अवसर दिया था। संसदीय चुनाव जीतने वाली नेशनल पीपुल्स पावर ने बोला कि लग्जरी वाहनों का आयात राष्ट्र के विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ है।