संसद का शीतकालीन सत्र हंगामे के साथ खत्म हो चुका है. अपनी आदत के मुताबिक विपक्ष विरोध के नाम पर सदन से भी राजनीतिक चिंगारी निकालने का कोशिश कर रहा है. संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के 75 साल पूर्ण होने के अवसर पर संविधान पर चर्चा का आयोजन किया गया था जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं ने संविधान पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये.
लोकसभा में पीएम मोदी और राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में संविधान, आरक्षण और डाक्टर आंबेडकर पर कांग्रेस पार्टी के विचारों को सप्रमाण सदन में रखा जिससे निरुत्तर हुई कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह के संबोधन से 12 सेकेंड का एक टुकड़ा उठाकर उसे बाबा साहेब का अपमान बताते हुए गृहमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इस झूठे विमर्श को सच सिद्ध करने के कोशिश में पूरा विपक्ष कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में एक बार फिर एकजुट हो रहा है.
यद्यपि दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप और कांग्रेस पार्टी आमने सामने हैं किन्तु आप के नेता भी गृहमंत्री की कथित टिप्पणी का वीडियो बनाकर गली-गली में घुमा रहे हैं कि शायद इसका फायदा विधानसभा चुनाव में मिल जाए. गृहमंत्री के खिलाफ उसी प्रकार का वातावरण बनाने का कोशिश किया जा रहा जैसा 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को आरक्षण विरोधी और संविधान विरोधी साबित करने के लिए किया गया था. अब हर एक दल और नेता डाक्टर आंबेडकर को भगवान बनाकर अपनी डूबती हुई सियासी नैया को पार लगाने का स्वप्न देखने लगा है. गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के अगले दिन राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा दलितों के प्रति अपना प्रेम दिखाने के लिए संसद परिसर में नीली टी शर्ट और नीली साड़ी पहनकर नमूदार हुए. उप्र में सपा भी भला पीछे क्यों रहती उसने भी डाक्टर आंबेडकर की तस्वीरों के साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा में जमकर हंगामा किया ओर सदन की कार्यवाही ठप करने का कोशिश किया.
गृहमंत्री के बयान के विरुद्ध विपक्ष देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का कोशिश कर रहा है. इस पूरे घटनाक्रम में बीएसपी नेत्री मायावती ने भी आक्रामक तेवर अपनाए हैं किन्तु वह सधे हुए बयान देकर कांग्रेस, बीजेपी और समाजवादी पार्टी तीनों ही दलों को नसीहत दे रही हैं. बीएसपी नेत्री मायावती कांग्रेस पार्टी पर हमलावर हैं, उनका बोलना है कि बाबा साहेब की उपेक्षा करने वाली और देशहित में उनके द्वारा किये गये संघर्ष को हमेशा आघात पहुंचाने वाली कांग्रेस पार्टी पार्टी का बाबा साहेब के अपमान को लेकर उतावालापन विशुद्ध छलावा है. बहिन मायावती ने डाक्टर आंबेडकर के प्रति प्रेम दर्शा रहे समाजवादियों की पोल भी खोलकर रख दी है, मायावती का मानना है कि आज सपाई बाबासाहेब के नाम पर पीडीए का पर्चा निकाल रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि समाजवादी पार्टी ने भी कभी भी डाक्टर आंबेडकर का सम्मान नहीं किया था. समाजवादियों ने वास्तव में बाबा साहब सहित बहुजन समाज में जन्मे सभी महान संतों, गुरुओं, महापुरुषों के प्रति द्वेष के अनुसार नए जिले, नयी संस्थाओं और जनहित योजनाओं तक के नाम बदल डाले थे. समाजवादी पार्टी गवर्नमेंट में तो डाक्टर आंबेडकर का नाम तक ठीक नहीं लिखा जाता था.
कांग्रेस पार्टी आज नीली टी शर्ट और नीली साड़ी पहनकर इतराती हुई घूम रही है और उसे लग रहा है कि उसे वह मामला मिल गया है जिससे उसकी वापसी की राह आसान हो जायेगी लेकिन कांग्रेस पार्टी बहुत बड़े भ्रम में है. सभी जानते हैं यह वहीं कांग्रेस पार्टी पार्टी है जिसने कभी भी डाक्टर आंबेडकर का सम्मान नहीं किया और न ही संविधान का कभी मान रखा. आज कांग्रेस पार्टी नीले कपड़े पहनकर दलित समाज को छलने के लिए निकल पड़ी है. यदि कांग्रेस पार्टी पार्टी ने कभी भी डाक्टर आंबेडकर का सम्मान किया होता तो आज उसकी यह दुर्गति न होती.
स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही कांग्रेस पार्टी और डाक्टर आंबेडकर के मध्य गहरे मतभेद उत्पन्न हो गये थे. कांग्रेस पार्टी के साथ बाबासाहेब का प्रथम टकराव 1930 में गोलमेज कांफ्रेस के समय हुआ था. आंबेडकर अनुसूचित जाति के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र चाहते थे जबकि गांधी जी इसके विरोधी थे. गांधी जी ने आंबेडकर जी के विरुद्ध आमरण अनशन तक किया था. 29 जनवरी 1932 को दूसरी गोलमेज सम्मेलन के बाद मुंबई में बाबा साहब ने बोला कि मुझे कांग्रेसी देशद्रोही कहते हैं, यानी आज जो बाबासाहब की फोटो लेकर राजनीति कर रहे हैं,उस समय उन्हें गद्दार कहते थे. संविधान सभा में आंबेडकर जी के चयन का रास्ता भी नेहरू जी ने ही रोका था. हिंदू कोड बिल और गवर्नमेंट की दलित विरोधी मानकिता के चलते आंबेडकर ने 1951 में नेहरू मंत्रिमंडल से त्याग-पत्र देते हुए लिखा, “संरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता अनुसूचित जाति को है पर नेहरू का सारा ध्यान केवल मुसलमानों पर है. ध्यान देने योग्य बात है कि आज भी कांग्रेस पार्टी पार्टी पूरी तरह मुसलमान परस्त है.
कांग्रेस स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी आंबेडकर जी का लगातार अपमान करती रही. बाबा साहब को 40 वर्ष तक हिंदुस्तान रत्न के लिए प्रतीक्षा करना पड़ा जबकि कांग्रेस पार्टी अपने ही परिवार को हिंदुस्तान रत्न देती रही. नयी दिल्ली में गांधी नेहरू परिवार की पीढ़ियों के स्मारक बने हैं जबकि गांधी परिवार ने आंबेडकर जी का आखिरी संस्कार तक दिल्ली में नही होने दिया. कांग्रेस पार्टी ने पग-पग पर डाक्टर आंबेडकर के विचारों का धुर विरोध किया और आज राहुल गांधी नीली टी शर्ट पहनकर उनके अपमान पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. वस्तुतः कांग्रेस पार्टी का आंबेडकर के प्रति प्रेम 2019 लोकसभा चुनाव में हारने के बाद से उमड़ा है.
गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी और विरोधी दलों के सभी आरोपों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह सपने में भी डॉ.आंबेडकर का अपमान नहीं कर सकते. संसद में चर्चा के दौरान यह तो सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस पार्टी ने न सिर्फ़ जीते जी बाबा साहेब का लगातार अपमान किया वरन उनकी मौत के बाद भी उनका मजाक उड़ाने का कोशिश किया. जब तक कांग्रेस पार्टी सत्ता में रही बाबा साहेब का एक भी स्मारक नहीं बना जबकि जहां -जहां अन्य दलों की सरकारें आती गई वहां -वहां उनका स्मारक बनता चला गया. पीएम मोदी की गवर्नमेंट ने बाबासाहेब के जीवन से संबंधित पंचतीर्थ विकसित किये. जिसमें मध्य प्रदेश में महू, लंदन में डाक्टर भीमराव आंबेडकर स्मारक, नागपुर में दीक्षा भूमि, दिल्ली में राष्ट्रीय स्मारक और महाराष्ट्र के मुंबई में चैत्य भूमि का विकास किया. 19 नवंबर 2015 को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने डाक्टर आंबेडकर के सम्मान में 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की घोषणा की. आज जो लोग संविधान की पुस्तक हाथ में लेकर घूम रहे हैं यही लोग संविधान दिवस का विरोध और बहिष्कार करते रहे हैं.
कांग्रेस के नेतृत्व में आज संपूर्ण विपक्ष सिर्फ़ वोटबैंक की राजनीति के कारण ही सदन में डाक्टर आंबेडकर के अपमान का मामला उछाल रहा है, क्योंकि राष्ट्र में 20 करोड़ 13 लाख 78 हजार 86 दलित हैं जो जनसंख्या का 16.63 प्रतिशत है. दलितो की जनसंख्या का ग्रामीण क्षेत्रों में 68.8 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 23.6 प्रतिशत है. इस जनसंख्या को अपना वोट बैंक बनाने के लिए आतुर कांग्रेस पार्टी अपने साथियों के साथ मिलकर रोज नए नए स्टंट कर रही है क्योंकिउसको लगता है कि अकेले मुसलमान वोट बैंक से उसे सत्ता नहीं मिल सकती.