सहारनपुर के फुलवारी आश्रम में चल रहे सबसे पुराने अखाड़े में तैयारी कर रहे पहलवान बाजार में मिलने वाले पॉउडर और अन्य पदार्थो का खाने में प्रयोग नही करते हैं। बल्कि दो सौ साल पुराने अखाड़े से दांव पेंच सीखने वाले युवा देसी जड़ी बूटियां और ड्राई फ्रूट्स का खाने में प्रयोग करते हैं। यही कारण है कि देसी चीज़ों को खाने वाले पहवालनों की स्वास्थ्य जिम में एक्सरसाइज करने वाले और फिटनेस बनाने के लिए बाजार के पॉउडर खाने वाले युवकों से अलग होती है। अखाड़े के पहलवान अधिकांश जड़ी बूटियां और अन्य चीज़ों को सिल बट्टे पर पीसकर तैयार करते हैं और खाने में प्रयोग करते हैं।
सहारनपुर के फुलवारी आश्रम में करीब 200 साल पुराना अखाड़ा चल रहा है। आज भी इस अखाड़े में पहलवान कुश्ती के दांव पेंच सीखकर राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जनपद का नाम रोशन कर रहे हैं। 20 दशकों से अपनी पहचान बनाने वाले फुलवारी आश्रम के इस अखाड़े में पहलवानी करने वाले विक्की पालीवाल ने कहा कि अखाड़े की स्थापना के समय से ही यहां पर रुस्तमें हिंद नाम से एक पुरस्कार बना था। यह अखाड़ा पारम्परिक रूप में आज भी पहलवानों के लिए अस्तित्व में है। कुश्ती में जीत हासिल कर अखाड़े का नाम रोशन करने वाले पहलवान को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है।