दरअसल, आईआईटी के वैज्ञानिकों ने एसी को किफायती एयर प्यूरीफायर में बदलने के लिए नयी तकनीक विकसित की है. आईआईटी कानपुर और आईआईएससी बेंगलुरु के वैज्ञानिकों की सहायता से इसी तकनीक का उपयोग कर स्टार्टअप एयर्थ ने एयर फिल्टर को विकसित किया है. संस्थान के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रोफेसर इनचार्ज प्रो।अंकुश शर्मा ने बताया कि इसमें उपयोग की गई नयी वायु शुद्धीकरण तकनीक हर तरह के वायरस के खतरे से बचाने में भी सक्षम है.
पांच गुना कम है मूल्य आईआईटी के प्रो। अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि इस तरह के एयर फिल्टर 10 हजार रुपये के आते हैं, जो केवल हवा को शुद्ध करते हैं. आईआईटी का एयर फिल्टर हवा शुद्ध करने संग बैक्टीरिया और वायरस को भी समाप्त करेगा. यह पीएम 2.5, पीएम 10, धूलकण, परागकण, कीटाणु को पकड़ने में सक्षम है.
99.24 सफलता
रवि का दावा है कि यह एयर फिल्टर एंटी माइक्रोबियल एयर प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी से युक्त है. इसका परीक्षण एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में किया गया है, जहां यह 99.24 प्रतिशत हवा शुद्ध करने में सफल रहा है.
सर्दियों में होगा लाभदायक
एयर्थ के फाउंडर रवि कौशिक ने बताया कि यह फिल्टर बाजार में मौजूद है. एसी में लगने के बाद ये सर्दियों में अधिक लाभदायक होगा, जब स्मॉग और प्रदूषण तेजी से बढ़ता है और लोग शुद्ध हवा के लिए परेशान होते हैं. यह तकनीक एक आसान आसान उपकरण के रूप में है, जिसे नियमित एसी के ऊपर सरलता से लगाया जा सकता है और ‘फैन मोड’ पर स्विच करके इसका इस्तेमाल किया जा सकता है