पौष्टिक खाना खाने के साथ ही खाना पकाने वाले बर्तनों का भी ध्यान रखना चाहिए। आपकी स्वास्थ्य का राज इसमें भी छुपा होता है कि आप किन बर्तनों में खाना पकाते हैं। वैसे तो रसोई में धातुओं के बर्तन होते हैं जैसे स्टील, एल्युमीनियम, स्टेनलेस स्टील, लोहा। पहले के समय में गांव-देहात के घरों में अक्सर लोहे या मिट्टी के बर्तनों को खाना पकाने के लिए उपयोग किया जाता था। ऐसा आज भी देखने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं किस धातु में खाना पकाना आपकी स्वास्थ्य को सबसे अधिक लाभ दे सकता है। यदि नहीं तो आज हम आपको बताते हैं इसके बारे में।
1. स्टेनलेस स्टील के बर्तन- आजकल अधिकांश घरों में स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में खाना बनता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें खाना कम समय में पक जाता है। स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में आप एक साथ कई चीजें पका सकते हैं। लेकिन आपको बता दें खाना पकाने के बाद उसमें केवल 60 से 70 फीसदी ही पोषक तत्व बच पाते हैं। इसलिए बाजार से क्रोमियम या निकल से पॉलिश हुए स्टेनलेस स्टील बर्तन न खरीदें। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
3. लोहे के बर्तन- ऐसा माना जाता है कि लोहे के बर्तन में खाना पकाना स्वास्थ्य के लिहाज से काफी लाभकारी होता है। अन्य बर्तनों के मुकाबले यह बेस्ट धातु है। यदि आप कास्ट आयरन या कच्चे लोहे के बर्तनों में खाना पकाते हैं तो बहुत कम मात्रा में आयरन खाने में घुलता है। यह शरीर को स्वस्थ रखता है। जिन लोगों को आयरन की कमी हो उन्हें लोहे के बर्तनों में पका हुआ खाना खाना चाहिए।
4. एल्युमीनियम के बर्तन- एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने से आपके घर में लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। क्योंकि एल्युमीनियम एक प्रकार का थायरोटॉक्सिक मेटल होता है जो खाने में सरलता से घुल जाता है। इसलिए प्रयास करें कि एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना न पकाएं। इससे आपको कब्ज, लिवर डिसऑर्डर, पैरालिसिस या दिमाग से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
5. नॉन-स्टिक बर्तन- आजकल नॉन-स्टिक बर्तनों का चलन काफी बढ़ गया है। आपको हर किचन में ये बर्तन जरूर मिलेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पकाने से जलने औऱ चिपकने का झंझट नहीं रहता है। वहीं ज्यादातर नॉन-स्टिक बर्तन टेफ्लॉन से कोटेड होते हैं। इसमें कैडमियम और मरकरी पाए जाते हैं। जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। इन बर्तनों में खाना पकाने से कैंसर, किडनी, लिवर डिजीज, हार्ट डिजीज, मेंटर प्रॉब्लम्स जैसी रोंगों का खतरा बढ़ता है।