शालिनी उनीकृष्णन केरल की एक हिन्दू लड़की। उसी हिन्दू लड़की से पुलिस अफसर का प्रश्न – आपने आतंकवादी संगठन ISIS क्यों ज्वाइन किया? इस डायलॉग के साथ प्रारम्भ होता है द केरल स्टोरी का टीज़र। और लड़की के उत्तर में फिल्म की पूरी कहानी है। कहानी है एक लड़की के उकसावे पर दूसरी लड़की का हिन्दू से मुसलमान धर्म अपनाने के जाल में फंसना।और इस्लाम अपनाने के बाद कैसे उसको आतंकवादी संगठन से जोड़ दिया जाता है। इतना तो आप समझ गए होंगे कि फिल्म में हिन्दू लड़कियों के धर्म बदलाव करवाने के बाद उनको आतंकवादी गतिविधियों से जोड़े जाने की कहानी है। पहले इस कहानी के टीजर में 32 हजार स्त्रियों को लव जिहाद के जाल में फंसाकर हिन्दू से मुसलमान बनाने की बात कही गयी थी लेकिन अब इसमें परिवर्तन किया गया है। सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म के कई डायलॉग और सीन पर कैंची चला दी है।फिल्म में कई परिवर्तन करने के बाद अब यह फिल्म 5 मई शुक्रवार को सिनेमाघरों में आ रही है।
फिल्म में सबसे बड़ा बदलाव
सुदीप्तो सेन की फिल्म द केरल स्टोरी का यह ट्रेलर रोंगटे खड़े कर देता है। ट्रेलर में एक स्थान डायलॉग है कि – हमारे पूर्व सीएम ने कहा है अगल 20 वर्ष में केरल इस्लामिक स्टेट बन जाएगा। फिल्म इसी मामले के इर्द गिर्द है। टीजर के सामने आने के बाद से ही इस पर टकराव प्रारम्भ हो गया है। पहले इसमें लिखा गया था कि केरल से 32 हजार महिलाएं गुमशुदा हैं। लेकिन टकराव के बाद अब इस संख्या को 32 हजार की स्थान 3 रखा गया है। मंगलवार को सामने आए नए वीडियो में लिखा है कि तीन स्त्रियों का धर्म बदलाव किया गया और उन्हें हिंदुस्तान और विदेशों में आतंकवादी गतिविधियों पर भेजा गया।
राजनैतिक पार्टियों का विरोध
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने फिल्म में 32 हजार स्त्रियों वाली बात का विरोध करते हुए ट्वीट किया कि केरल में 32000 स्त्रियों ने इस्लाम कबूला, इस दावे को सच साबित करने वाले सबूत जमा करें और एक करोड़ रुपये ले जाएं। वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ट्वीट किया कि, हिंदी फिल्म द केरल स्टोरी जिसका ट्रेलर पिछले दिनों जारी किया था, यह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से और केरल के विरूद्ध नफरत फैलाने के उद्देश्य से जानबूझकर बनाई गई है।
विवाद के बाद मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा
टीजर के सामने आने के बाद जो टकराव खड़ा हुआ इसको लेकर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट-कांग्रेस पार्टी ने न्यायालय से फिल्म के रिलीज होने पर रोक लगाने की मांग की। याचिका में बोला गया कि फिल्म नफरत की भावना को बढ़ावा देती है। लेकिन न्यायालय ने फिल्म के रिलीज होने को चुनौती देना इसका निवारण नहीं माना और इस मुद्दे में तुरन्त सुनवाई करने से मना कर दिया।