फिल्म ‘आदिपुरुष’ में भगवान राम, देवी सीता और भगवान हनुमान जैसे धार्मिक पात्रों का शर्मनाक और घिनौना चित्रण करके इसके मेकर्स ने बड़े पैमाने पर लोगों की भावनाओं को आहत किया है. अब इसी बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ के निर्देशक ओम राउत और डायलॉग राइटर मनोज मुंतशिर शुक्ला को न्यायालय में पर्सनल रुप से मौजूद होकर अपनी बात रखने की मांग की है.
कोर्ट ने कहा- फिर से हो सर्टिफिकेट की समीक्षा
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की बेंच ने सेंट्रल सरकार को प्रभास, सैफ अली खान और कृति सेनन अभिनीत फिल्म को जारी किए गए सर्टिफिकेट की फिर से समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है.
धार्मिक पात्रों की पवित्रता का नहीं रखा ध्यान
28 जून को दिए अपने आदेश में न्यायालय ने यह भी बोला है कि फिल्म के डायलॉग राइटर सहित फिल्म निर्माताओं ने फिल्म में धार्मिक पात्रों को उनकी पवित्रता का ध्यान रखे बिना पेश किया है.
इस संबंध में न्यायालय ने आगे बोला कि फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन के नाम पर किसी को भी शालीनता या नैतिकता या पब्लिक ऑर्डर आदि के विरूद्ध कुछ भी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
बेंच ने कहा- प्रथम दृष्टि से ही घटिया है यह फिल्म
कोर्ट ने कहा, ‘हमारे लिए, यह फिल्म पहली नजर से ही भारतीय कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 19 के अनुसार निर्धारित किए गए टेस्ट में ही क्वालीफाई नहीं होती है… न सिर्फ फिल्म के डायलॉग घटिया भाषा के हैं, बल्कि देवी सीता को चित्रित करने वाले फिल्म के कई सीन भी उनके चरित्र के लिए अपमानजनक हैं. विभीषण की पत्नी का चित्रण करने वाले कुछ सीन भी पहली नजर से ही आपत्तिजनक हैं. यहां तक कि रावण, उसकी लंका आदि का पिक्चराइजेशन भी कितना फनी और चीप है.’
कोर्ट- मेकर्स ने लोगों के इमोशंस का भी ख्याल नहीं रखा
कोर्ट ने आगे कहा, ‘ऐसी फिल्म बनाते समय, फिल्म मेकर्स और डायलॉग राइटर ने बड़े पैमाने पर किरदारों और संवादों को शर्मनाक और अश्लील ढंग से पेश करते हुए पब्लिक के इमोशंस और फीलिंग्स का ख्याल नहीं रखा है, वो भी यह जानते हुए कि ये भूमिका पूज्यनीय हैं.’
सेंसर बोर्ड ने पूरी नहीं की लीगल ड्यूटी
इसके साथ ही न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि सेंसर बोर्ड सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के सेक्शन 5-बी के अनुसार जारी गाइडलाइन्स को फाॅलो किए बिना फिल्म रिलीज करने के लिए सर्टिफिकेट जारी करते समय अपनी लीगल ड्यूटी पूरी करने में असफल रहा.
कोर्ट ने ये टिप्पणियां उन दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कीं जिसमें फिल्म ‘आदिपुरुष’ से आपत्तिजनक संवादों और दृश्यों को हटाने का निर्देश देने की मांग की गई थी.