janmashtami :छोटे परदे पर राधाकृष्ण शो अपने अनूठे कंटेंट और कलाकारों के एक्टिंग की वजह से आज भी दर्शकों के जेहन में रचा बसा है।इस शो को छोटे परदे पर साकार निर्माता, लेखक और निर्देशक सिद्धार्थ कुमार तिवारी ने किया था। जन्माष्टमी के खास मौके पर एक बार फिर उन्होंने भगवान कृष्ण के प्रति अपनी आस्था को गीत अच्युतम केशवम के ज़रिये दर्शाया है।इस पारंपरिक भक्तिमय गीत को उन्होंने ए आई की सहायता से विजुवली क्रिएट किया है। उनके इस म्यूजिक वीडियो, शो श्रीमद रामायण पर उर्मिला कोरी की हुई बातचीत|
एआई का इस्तेमाल इस म्यूजिक वीडियो की है खासियत
जैसे की सभी जानते हैं कि टेलीविज़न पर माइथोलॉजी शोज की मेरी लम्बी फेहरिश्त है, जो लोग मुझे जानते हैं. वे इस बात से परिचित हैं कि मैं हमेशा अलग तरह से मौजूदा दौर को ध्यान में रखते हुए कहानियों को कहता हूँ, तो मैंने म्यूजिक वीडियो में भी इस बात को लाया है।इस गीत के कंपोजर और सिंगर हर्षित सक्सेना है लेकिन ए आई के ज़रिये हमने भगवान कृष्ण और इस गाने में उनकी दुनिया को रची है,जो इस गाने को यूथ के साथ जोड़ देता है।ए आई से क्रिएट कृष्ण के इस रूप को हम आगे भी बढ़ाएंगे।
स्वास्तिक प्रोडक्शन हाउस का फोकस अध्यात्म पर होगा
जन्माष्टमी आरंभ है।स्वास्तिक प्रोडक्शन हाउस आगे भी भक्तिमय गानों को लाता रहेगा। स्वास्तिक की जर्नी अभी तक बहुत अच्छी रही है। अब हम अधिक से अधिक अध्यात्म पर ही हमारा फोकस रहेगा। इसमें जितनी भी चीज आती है चाहे आयुर्वेद,वेदों सभी चीजों को स्वास्तिक लेकर आएगा।मेडिटेशन साथ म्यूजिक भी आएगा।वेदों में लिखा हुआ किस तरह का खाना खाना चाहिए।सिर्फ म्यूजिक ही नहीं बल्कि हम यह भी बता रहे हैं कि जन्माष्टमी क्यों सेलिब्रेट किया जाना चाहिए। पूजा किस तरह से की जानी चाहिए। पूजा में भगवान को किस तरह के कपड़े पहनना चाहिए। क्या भोग लगाना चाहिए।
दीपिका चिखलिया जी की बात से सहमत नहीं हूँ
सोनी सब पर इनदिनों मेरा शो श्रीमद रामायण टेलीकास्ट हो रहा है।अभिनेत्री चिखलिया जी का बोलना है कि राष्ट्र में रामायण पर कहानियां बननी बंद हो जानी चाहिए.मैं इस बात को नहीं मानता हूँ। हमारे राष्ट्र में हर 10 वर्ष में एक पीढ़ी बदलती है। मुझे लगता है कि जनरेशन बदलता है तो सोच भी बदलती है। आज से 20 वर्ष पहले जैसे मेरे पिता और मेरे बीच में रिश्ता था वैसा मेरा और मेरे बेटे के बीच में नहीं है। संबंध का बेस वही है लेकिन उसका एक्सप्रेशन बदल चुका है। पुरानी रामायण के साथ मेरी बहुत अच्छी मेमोरी है। महाभारत समाप्त होने के बाद ही मेरे जेहन में चल रहा था कि काश में रामायण की कहानी भी एक नए ढंग से लोगों तक कह पाऊं। इस राष्ट्र में रामायण और महाभारत दोनों ही कहानी कहने का मौका किसी एक को कभी नहीं मिला है। बस ऐसे ही थॉट आ गया था। यह वाली बात नहीं थी। मैं कई वर्षों से किताबें पढ़ रहा हूं। इसके साथ ही मैं आज के दर्शकों के लिए रामायण बना रहा हूं तो उसकी दुनिया क्या होगी क्या बात सामने आनी चाहिए। उसकी विजुअल प्रेजेंटेशन क्या होना चाहिए। उसके गाने कैसे होनी चाहिए।यह सब मेरे जेहन में चलता रहता है।
इस वजह से सोनी से सबटीवी पर हुआ शिफ्ट
मैंने महाभारत की कहानी लिमिटेड एपिसोड में कही थी और मैं रामायण की कहानी भी लिमिटेड एपिसोड में ही बोलना चाहता था। राम के वन आने के बाद राज्याभिषेक के साथ में कहानी समाप्त करने वाला था,लेकिन कहानी लिखते -लिखते मैंने महसूस किया कि इसके बाद तो असल कहानी प्रारम्भ होती है। राम राजा बनते हैं।राम राज्य की आरंभ होती है। राम और सीता का रिश्ता। मुझे लगा कि यह चीजें मौजूदा दौर के हिसाब से सामने ला सकते हैं।कहानी को आगे बढ़ने का सोच के साथ मैं सोनी के पास गया लेकिन उन्होंने बोला कि इस स्लॉट में हर वर्ष केबीसी आता है। मुझे सोनी सब पर श्रीमद रामायण को लाने को कहा। मैं राजी हो गया। कहानी बोलना चाहता हूं मेरे लिए माध्यम अधिक अर्थ नहीं रखता है।