Make In India: मेक इन इण्डिया मुहिम के अनुसार आत्मनिर्भर हिंदुस्तान को बढ़ावा देने के लिए गवर्नमेंट बजट में कई अहम घोषणा कर सकती है। आशा जताई जा रही है कि 35 सामानों पर गवर्नमेंट कस्टम ड्यूटी बढ़ाने की घोषणा कर सकती है। इन सामानों के मूल्य बढ़ने से राष्ट्र में इनकी उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा और मेक इन इण्डिया प्रोडक्ट्स की सेल्स को बढ़ाने में भी यह निर्णय अहम साबित हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंपोर्ट घटाने और घरेलू उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए 35 सामानों पर गवर्नमेंट कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का घोषणा कर सकती है। इन सामानों में विटामिन, हाई ग्लॉस पेपर, ज्वैलरी, प्लास्टिक के सामान, हाई एंड इलेक्ट्रॉनिक आइटम, प्राइवेट जेट और हेलिकॉप्टर शामिल है। जानकारी के मुताबिक, विभिन्न मंत्रालयों से उन सामानों की लिस्ट भी मिल गई है, जिन पर गवर्नमेंट कस्टम ड्यूटी बढ़ा सकती है। साथ ही उसने इसके लिए पूरी प्लानिंग भी कर ली है। ये सामान हिंदुस्तान में ही बनाए जाएं, इसके लिए इनके आयात को महंगा किया जा रहा है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालयों से ऐसे गैर-जरूरी आयातित सामानों की लिस्ट बनाने के लिए बोला था, जिनकी कस्टम ड्यूटी में वृद्धि किया जा सकता है। दरअसल गवर्नमेंट चालू खाते के घाटे को कम करना चाहती है, इसलिए वह इंपोर्ट को कम करने में जुटी हुई है। जुलाई-सितंबर तिमाही के चालू खाते का घाटा पिछले 9 महीने के सबसे अधिक स्तर 4.4 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
महंगाई से मुश्किलों में सरकार
डेलॉयट ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि चालू खाते में इजाफे की संभावना कायम है। आयात बिल के खतरे के अतिरिक्त वर्ष 2023-24 में एक्सपोर्ट पर महंगाई की मार पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों की माने तो क्षेत्रीय मांग के एक्सपोर्ट ग्रोथ को पीछे करने के अतिरिक्त मर्चेंडाइज व्यापार घाटा 25 अरब $ प्रति माह रह सकता है। यह चालू खाते के घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 3.2-3.4 प्रतिशत के बराबर रखने में सफलता हासिल कर सकता है। इसके अतिरिक्त गवर्नमेंट मेक इन इण्डिया प्रोग्राम को और मजबूत करने के लिए सीमा शुल्क में वृद्धि कर सकती है।