रिपोर्ट में बोला गा है कि दोनों पक्ष एक समझौते के करीब हैं. दावा किया गया है कि औपचारिक अधिग्रहण अगस्त तक हो सकता है. विस्ट्रॉन अपनी कर्नाटक सुविधा में आईफोन 14 को असेंबल करता है, डील फाइनल होने के बाद टाटा ग्रुप इसकी देखरेख करेगा.
टाटा ग्रुप जल्द ही हिंदुस्तान और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए आईफोन असेंबल करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन सकती है. टाटा कई महीनों से कर्नाटक में ताइवान स्थित विस्ट्रॉन कॉर्प की फैक्ट्री का अधिग्रहण करने के लिए वार्ता कर रही है. जैसा कि ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया है. रिपोर्ट में बोला गा है कि दोनों पक्ष एक समझौते के करीब हैं. दावा किया गया है कि औपचारिक अधिग्रहण अगस्त तक हो सकता है. विस्ट्रॉन अपनी कर्नाटक सुविधा में आईफोन 14 को असेंबल करता है, डील फाइनल होने के बाद टाटा ग्रुप इसकी देखरेख करेगा. टाटा का सौदा हार्डवेयर विनिर्माण क्षेत्र में हिंदुस्तान की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है, जो पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट का दीर्घकालिक लक्ष्य भी रहा है. गवर्नमेंट आक्रामक रूप से अपनी भारत-निर्मित पहल पर जोर दे रही है, जो कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की नवीनतम अमेरिका यात्रा के दौरान भी चर्चा में थी.
रिपोर्ट में बोला गया है कि कर्नाटक में विस्ट्रॉन की फैक्ट्री का मूल्य संभावित रूप से $600 मिलियन (4000 करोड़ रुपये से अधिक) है. इस सुविधा में 10,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं जो नवीनतम पीढ़ी के iPhone 14 को असेंबल करते हैं. रिपोर्ट में बोला गया है कि ताइवानी निर्माता ने एप्पल को चालू वित्तीय साल में 1.8 बिलियन $ मूल्य के iPhone भेजने के लिए प्रतिबद्ध किया है. ब्लूमबर्ग को टाटा-विस्ट्रॉन सौदे से परिचित लोगों के अनुसार, विस्ट्रॉन ने मार्च 2024 तक वित्तीय साल में जीत हासिल करने के लिए आईफोन निर्माता के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए. फैक्ट्री अगले वर्ष तक प्लांट में कर्मचारियों की संख्या तीन गुना करने की भी योजना बना रही है. टाटा कथित तौर पर इन सौदों का सम्मान करने के लिए सहमत हो गया है.
विस्ट्रॉन के अलावा, Apple को iPhone 13, आईफोन 12 और आईफोन SE सहित चुनिंदा आईफोन मॉडल मिलते हैं, जिन्हें हिंदुस्तान में फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप और पेगाट्रॉन कॉर्प जैसे ताइवानी आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से हिंदुस्तान में असेंबल किया जाता है. हिंदुस्तान में विस्ट्रॉन फैक्ट्री को संभालने के लिए टाटा का सौदा भी जरूरी होगा क्योंकि कई तकनीकी कंपनियां अपने प्रीमियम उपकरणों की असेंबली के लिए चीन के विकल्पों पर विचार कर रही हैं. Apple पहले से ही अगले विनिर्माण केंद्र के रूप में हिंदुस्तान पर भारी भरोसा कर रहा है.