पितृपक्ष 11 सितंबर दिन रविवार से प्रांरभ होकर आनें वाले 25 सितंबर को पितृ विसर्जन होगा. पितृ पक्ष प्रारंभ होने के साथ पितरों का पितृ तर्पण और पिण्डदान प्रारम्भ होता है. पिता की मौत तिथि ज्ञात न होने पर पितृ विसर्जन के दिन श्राद्ध करना चाहिए. पितृ पक्ष में पितरों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मुख्य नियमों का अवश्य पालन करना चाहिए.
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पाण्डेय, पंडित पुरुषोत्म दुबे और पंचायती राज संस्कृत पाठशाला के प्रिंसिपल पंडित अवधेश तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष 11 सितम्बर दिन रविवार से आरम्भ होगा. पितृपक्ष इस साल रविवार से आरम्भ हो रहा है. उस दिन प्रातःकाल सूर्योदय से ही पितृपक्ष आरम्भ हो जाएगा. ऐसे में उस दिन से पितृ तर्पण और पिण्ड दान आदि कार्य आरम्भ हो जायेंगे. इस बार 15 दिन तक चलने वाला पितृ पक्ष का पितृ विसर्जन 25 सितम्बर को होगा. मध्याह्ने श्राद्धम् समाचरेत…अतः श्राद्ध कार्य कभी भी मध्याह्न में करना चाहिए. बहुत लोग इस बात से भ्रमित रहते है कि मैंने इस साल अपनी कन्या या पुत्र का शादी आदि मांगलिक कार्य किये हैं.
पितृपक्ष की निम्न तिथियां- प्रतिपदा श्राद्ध 11 सितम्बर रविवार को, द्वितीया श्राद्ध सोमवार को, तृतीया मंगलवार को, चतुर्थी बुधवार को, पंचमी गुरुवार को, षष्ठी शुक्रवार को, सप्तमी शनिवार को, अष्टमी रविवार को, नवमी सोमवार को, दशमी मंगलवार को, एकादशी बुधवार को, द्वादशी गुरुवार को, त्रयोदशी शुक्रवार को, चतुर्दशी शनिवार को, अमावस्या रविवार को है.
पिता के मौत तिथि ज्ञात न होने पितृ विसर्जन को करें श्राद्ध
- ज्योतिषाचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि सिर का मुण्डन पितृ पक्ष के भीतर या तिथि पर नहीं करना चाहिए, क्यों कि फैसला धर्म सिंधु में यह बोला गया है कि पितृ पक्ष में सिर के बाल जो भी गिरते है. वह पितरों के मुख में जाते हैं. अतः सिर के बाल पितृ पक्ष आरम्भ होने के 1 दिन पूर्व बनवा लें या गलती से नहीं बनवा पाते तो पितृ विसर्जन के दिन अपराह्न काल में बनवावें. ऐसा करने से पितर सन्तुष्ट होते हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
इससे कुल की वृद्धि और यश कीर्ति, लाभ, आरोग्यता और मोनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. बताया कि तिथि ज्ञात होने पर तिथि के साथ अमावस्या तथा तिथि ज्ञान नहीं होने पर अमावस्या को पितृ विसर्जन का श्राद्ध करना चाहिए.