इस कामयाबी से अमेरिका और रूस जैसी दुनिया की दो शीर्ष अंतरिक्ष शक्तियों के बीच चीन की स्थिति मजबूत होगी. इंडियाना यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रॉम वर्कशॉप के स्पेस गवर्नेंस प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाले अंतरिक्ष कानून और अंतरिक्ष नीति विद्वानों के रूप में हम रुचि के साथ चीनी अंतरिक्ष स्टेशन के विकास को देख रहे हैं. अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के विपरीत, तियांगोंग पूरी तरह से चीन द्वारा निर्मित और संचालित है. स्टेशन का सफल उद्घाटन विज्ञान के कुछ रोमांचक पलों में शुमार है. साथ ही स्टेशन राष्ट्र की आत्मनिर्भरता की नीति पर भी प्रकाश डालता है. इसके अतिरिक्त यह अंतरिक्ष में शक्ति के बदलते परिदृश्य के बीच बड़ी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने की दिशा में चीन के लिए एक जरूरी कदम है.
चीनी स्टेशन की क्षमताएं
चीन के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम ने तीन दशक में तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन का काम पूरा किया है. स्टेशन 180 फीट (55 मीटर) लंबा है और इसमें तीन ‘मॉड्यूल’ शामिल हैं जिन्हें अलग से लॉन्च करने के बाद अंतरिक्ष में जोड़ा गया था. इनमें एक कोर ‘मॉड्यूल’ शामिल है जहां अधिकतम छह अंतरिक्ष यात्री रह सकते हैं. इसके अतिरिक्त 3,884 क्यूबिक फुट (110 क्यूबिक मीटर) के दो मॉड्यूल हैं. स्टेशन के पास एक बाहरी रोबोटिक खंड भी है, जो स्टेशन के बाहर गतिविधियों और प्रयोगों पर नजर रखता है. आपूर्ति वाहनों और मानवयुक्त अंतरिक्ष यान के लिए तीन डॉकिंग पोर्ट हैं.
15 वर्ष तक कक्षा में रह सकता है
चीन के विमान वाहकों और अन्य अंतरिक्ष यान की तरह तियांगोंग सोवियत-युग के डिजाइन पर आधारित है. यह 1980 के दशक के सोवियत अंतरिक्ष स्टेशन ‘मीर’ से काफी मिलता जुलता है. लेकिन तियांगोंग स्टेशन का काफी आधुनिकीकरण किया गया है. चीनी अंतरिक्ष स्टेशन 15 वर्ष तक कक्षा में रह सकता है. जिसमें हर वर्ष छह-छह महीने के लिए संचालन दल और कार्गो मिशन भेजने की योजना है. स्टेशन में वैज्ञानिक परीक्षण पहले ही प्रारम्भ हो चुके हैं.