कजाकिस्तान में तुर्की और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के साथ सीरिया वार्ता के नए दौर के बाद उन्होंने कहा, “हमें आशा है कि अंकारा (तुर्की की राजधानी) में हमारी दलीलें सुनी जाएंगी और परेशानी को हल करने के अन्य ढंग खोजे जाएंगे.” रूस की तरफ से ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति ने सीरिया पर और हमलों की धमकी दी थी.
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने संकेत दिया कि उनका राष्ट्र सीरिया में सीमा पार स्थित कुर्द नेतृत्व वाली पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (या वाईपीजी) बलों पर हमला करने के लिए जमीनी बलों को तैनात करने की योजना बना रहा है. मध्य इस्तांबुल में 13 नवंबर की बमबारी के लिए तुर्की वाईपीजी के मूल संगठन, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) को दोषी मानता है. इस हमले में छह लोग मारे गए थे.
एर्दोगन ने मंगलवार को एक भाषण में कहा, “हम अपने विमानों, तोपों और बंदूकों से कुछ दिनों से आतंकियों पर दबाव बना रहे हैं. ऊपर वाले ने चाहा तो हम अपने टैंकों, अपने सैनिकों के साथ मिलकर उन सभी को जल्द से जल्द जड़ से समाप्त कर देंगे.”
एर्दोगन ने पिछले छह महीनों में इसी तरह की धमकी दी है. लेकिन रविवार को सीमा पार कई हवाई हमले किए गए. इन हमलों ने इस आसार को बढ़ा दिया है कि एक बड़ा सेना अभियान प्रारम्भ हो सकता है. हालांकि रूस ने किसी भी संभावित ऑपरेशन के विरूद्ध चेतावनी दी है. रूस ने बोला है कि रूस सीरिया पर तुर्की की “वैध” सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करता है, लेकिन साथ ही बोला कि सभी पक्षों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो स्थिति को खराब कर सकते हैं.
रूस के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को संवाददाताओं से बोला कि रूस और तुर्की के बीच सीरिया को लेकर असहमति है. हालांकि रूस ने कगहा कि वह तुर्की की सुरक्षा चिंताओं को समझता है. उन्होंने कहा, “हम अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में तुर्की की चिंताओं को समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं. हमारा मानना है कि यह तुर्की का वैध अधिकार है. साथ ही, हम सभी पक्षों से उन कदमों से बचने का आह्वान करते हैं जो समग्र स्थिति को अस्थिर करने का कारण बन सकते हैं.”