- आतंकियों को बचाने में जुटा चीन
- पाकिस्तान के शाहिद महमूद को बचाया
- चार महीने में चौथी बार ऐसा किया
चीन ने पाक स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शाहिद महमूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकियों की सूची में डाले जाने के लिए संयुक्त देश में हिंदुस्तान और अमेरिका के प्रस्ताव में अडंगा लगा दिया है. पाक के पुराने साथी चीन ने अंतरराष्ट्रीय संगठन में किसी आतंकी को प्रतिबंधित सूची में डालने के कोशिश को चार महीने के अंदर चौथी बार बाधित किया है. ऐसा बताया जा रहा है कि चीन ने संयुक्त देश सुरक्षा परिषद की ‘1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति’ के अनुसार महमूद (42) को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के हिंदुस्तान और अमेरिका के प्रस्ताव को बाधित कर दिया है.
2007 में लश्कर से जुड़ा था महमूद
अमेरिकी वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर उपस्थित जानकारी के अनुसार, महमूद ‘पाकिस्तान के कराची स्थित लश्कर का एक पुराना सदस्य है और वह कम से कम 2007 से संगठन से जुड़ा है. वह जून 2015 से कम से कम जून 2016 तक फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) का उपाध्यक्ष रहा, जो लश्कर की धन जुटाने वाली इकाई है.’ वेबसाइट के अनुसार, 2014 में महमूद कराची में एफआईएफ का सदस्य था. अगस्त 2013 में उसकी पहचान लश्कर की प्रकाशन इकाई के एक सदस्य के तौर पर की गई थी.
जून में रहमान मक्की को बचाया
यह पिछले चार महीने में चौथी बार है, जब चीन ने ‘1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति’ के अनुसार पाक स्थित किसी आतंकी को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव को बाधित किया है. इससे पहले चीन ने इस वर्ष जून में पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल रहमान मक्की को संयुक्त देश सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के हिंदुस्तान और अमेरिका के संयुक्त प्रस्ताव को अंतिम क्षण में बाधित कर दिया था. मक्की लश्कर-ए-तैयबा के मुखिया एवं 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद का सम्बन्धी है.
मसूद अजहर के भाई का बचाव किया
चीन ने इस वर्ष अगस्त में जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के भाई और पाक स्थित आतंकी संगठन के दूसरे नंबर के आतंकी अब्दुल रऊफ अजहर को काली सूची में डालने के अमेरिका और हिंदुस्तान के प्रस्ताव में भी टांग अड़ाई थी. पाक में 1974 में जन्मे अब्दुल रऊफ अजहर पर दिसंबर 2010 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे. वह 1999 में ‘इंडियन एयरलाइंस’ के विमान ‘आईसी-814’ को अगवा करने की वारदात का मुख्य साजिशकर्ता था, जिसके एवज़ में उसके भाई मसूद अजहर को कारागार से रिहा कराया गया था.