श्रनगर : जम्मू-कश्मीर में राष्ट्र भर से आने वाले सैलानियों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में अब 181 गांव पर्यटन की दृष्टि से विकसित होने जा रहे हैं जिसमें होम-स्टे की सुविधा होगी। मिशन यूथ के अनुसार पर्यटन गांव विकास कार्यक्रम (टीबीडीपी) की पहल प्रारम्भ हो गई है। नए पर्यटन स्थलों के निर्माण के साथ साथ क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना भी एक लक्ष्य है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब इस तरह के कई कार्यक्रम केंद्र गवर्नमेंट उपराज्यपाल शासन के साथ मिलकर जम्मू और कश्मीर में करने जा रही है जिसमें बार्डर टूरिज्म, यूथ आउटरीच कार्यक्रम, गांवों को विकसित करने के लिए होम-स्टे और अन्य कई अहम कार्यक्रम हैं जो पहले ही लांच हो चुके हैं।
जम्मू-कश्मीर एक पर्यटन वाला राज्य है और उसका राजस्व भी इसी पर निर्भर है। लेकिन कई दशकों से आतंकवाद ने इस पर ग्रहण लगा दिया था। लेकिन अब आहिस्ता-आहिस्ता आतंक के बादल छंटने लगे हैं और आम लोगों के दिन भी संवरने लगे हैं। टूरिज्म प्रदेश की एक बड़ी इंडस्ट्री है जिस पर कई लोगों का रोजगार निर्भर है जिसमें ट्रांसपोर्ट, होटल और अन्य शामिल है।
अगर देखा जाए तो जम्मू और कश्मीर में बहुत से तीर्थ स्थल ऐसे हैं जहां पर अभी तक होम स्टे (Home Stay) की सुविधा नहीं है। कुछ ऐसे तीर्थ स्थल हैं जहां पर होटल और लॉज भी नहीं हैं, इसमें मचैल, पाडर, शिव खौडी, मानसर, सरुंरईसर, पीरबडेशर, नगांली साहिब, बुड्डा अमरनाथ, चीची माता, सुकराला माता, नूरी छम्ब, पीरी की गली और अन्य ऐसे कुछ प्रमुख स्थल हैं, जहां पर होम स्टे की आवश्यकता है। गवर्नमेंट के इस कार्यक्रम के अनुसार युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और बाहरी राज्यों से आने वालें सैलानियों को नया जम्मू और कश्मीर दिखेगा जो कभी आतंकवाद के चलते लुप्त हो चुका था।