रविवार को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर स्थित मंदिर में द्वारिका शारदा पीठ एवं ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य श्रीश्री 108 जगदगुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के देहावसान से चक्रधरपुर मनोहरपुर, आनंदपुर समेत समिज पारलीपोष स्थित विश्व कल्याण आश्रम में मातम छा गया है। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के देहावसान से पूरे कोल्हान अंचल में उनके शिष्य एवं उनके अनुयायियों में शोक की लहर है। चक्रधरपुर के मुन्ना पण्डित परिवार में अधिवक्ता पवन शर्मा आदि परिवार में भी शोक की लहर है।
विश्व कल्याण आश्रम के प्रभारी केवल्यानंद ने बोला कि उनके मृत्यु से सनातनी धर्म को अपूरणीय क्षति हुई है। श्री महाराज जी पिछले कुछ वर्षों से अस्वस्थ चल रहे थे, जिससे महाराज जी का आगमन साल 2018 के बाद विगत चार वर्षों से विश्व कल्याण आश्रम में वार्षिकोत्सव सह होलिकोत्सव कार्यक्रम में नहीं हो पाया है। उनके नहीं आने से होलिकोत्सव कार्यक्रम भी फीका रहा। वैसे इस अवसर पर विश्व कल्याण आश्रम में 10 दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाता है, जिसमें जगदगुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की असीम अनुकंपा से हर साल जनकल्याण के लिए नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में आंखों का आपरेशन एवं अनुभवी वैद्यों के सानिध्य में असाध्य मरीजों की चिकित्सा साथ ही धार्मिक अनुष्ठान, आध्यात्मिक प्रवचन, संकीर्तन, ब्रज की रासलीला, रुद्रायज्ञ, लाक्षचर्न यज्ञ, वायुवीरा हनुमान पाठोंत्सव एवं नारायणी सेवा इत्यादि अन्य कार्यक्रम आयोजित होते आ रहे हैं। वैसे इस अवसर पर महाराज जी के आने से राष्ट्र भर में उनके अनुयायी हज़ारों की संख्या में विश्व कल्याण आश्रम पहुंचते हैं। ऐसे तो वर्ष भर उनके शिष्य विश्व कल्याण आश्रम में आत्मशांति प्राप्त करने एवं प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण इस आश्रम में आते हैं।
विश्वकल्याण आश्रम की परिकल्पना शंकराचार्य की देन
जगदगुरु शंकराचार्य बनने से पूर्व स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती दंडी स्वामी के रूप में पहली बार 1965-67 के सालो में मनोहरपुर और आनंदपुर आए थे और उन्होंने समिज पारलीपोष में विश्वकल्याण आश्रम की स्थापना की।उल्लेखनीय है विश्वकल्याण आश्रम का निर्माण आनंदपुर राजपरिवार के द्वारा दी गई ज़मीन पर बना है। आश्रम के निर्माण में राजपरिवारों का अहम् सहयोग है। इस आश्रम में तभी से इन चार सालो को छोड़कर श्री महाराज जी लगातार आते रहे हैं, जिससे लगातार आश्रम में लोगों को अभिरुचि बढ़ रही है