जन्माष्टमी का दिन है। कृष्णमय माहौल है। राधे-राधे कहते हुए जब आंखें बंद करेंगे तो कृष्ण भगवान की जो छवियां उभरने लगेंगी, उन सभी में वो अपनी बांसुरी के साथ ही होंगे। कृष्ण और बांसुरी का संग ऐसा ही था जैसे कोई ऐसी जोड़ी जिसे अलग नहीं किया जा सकता। बगैर बांसुरी कृष्ण की कल्पना करना मुश्किल है। क्या आपको मालूम है कि बांसुरी उन वाद्यंयत्रों में है, जिसे शायद सबसे पहले मनुष्य ने बजाया। जब मनुष्य ने इसे अनायास ही पकड़ा और इसे फूंकते ही संगीत लहरियां निकलीं तो उसके आनंद का ठिकाना नहीं रहा।
वैसे तो बोला यही जाता है कि मनुष्य के विकासक्रम में बांसुरी उसके सबसे शुरुआती साथियों और वाद्ययंत्रों में रही होगी। ये आमतौर पर लकड़ी से ही बनती है। वैसे अब धातु की बांसुरी का भी उपयोग होने लगा है। होर्नबोस्टल-सैश्स के उपकरण वर्गीकरण के अनुसार, बांसुरी को तीव्र-आघात एरोफोन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
बांसुरी से भिन्न भिन्न तरह की कितनी ही धुनें निकाली जा सकती हैं। तेज, भारी, मामूली और तरह तरह की धुनें और संगीत। इससे कई तरह की प्राकृतिक आवाज़ें भी एक्सपर्ट लोग निकालकर दिखा देते हैं। मसलन कई तरह के पक्षियों की हू-ब-हू आवाजें।
ये है हिंदुस्तान की शास्त्रीय संगीत में इस्तेमाल होने वाली 08 छेदों की बांसुरी, जिसका बांस दक्षिण हिंदुस्तान में खास स्थान पर ही मिलता है।
यूरोप में मिल रही हैं 40000 वर्ष पुरानी बांसुरी
वैसे तो बोला जाता है कि बांसुरी का इतिहास 40,000 से 35,000 वर्ष पुराना है। हालांकि ये शायद और पुराना है। बहुत पुरानी बांसुरियां अब भी जर्मनी के स्वाबियन अल्ब क्षेत्र में पाई गई हैं। हिंदुस्तान में भी बांसुरी का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है।
दुनिया की तकरीबन सभी सभ्यताओं में बांसुरी की अपनी किरदार रही है। माना जाता है कि जब आदम काल में मनुष्य ने सूखी और पोली बांस की छेदवाली लकड़ी को अनायास फूंका होगा, जो उसने इससे अलग तरह की प्यारी सी धुन सुनी होगी। उसके बाद से ही ये उसके जीवन में जरूरी तौर पर शामिल हो गई होगी। ये भी बोला जाता है कि शायद सबसे पुरानी बांसुरी हड्डी से भी बनी होगी।
क्या पहली बांसुरी हड्डी से बनी
खोजी गई सबसे पुरानी बांसुरी गुफा में रहने वाले एक भालू की जांघ की हड्डी का टुकड़ा हो सकती है, जिसमें दो से चार छेद हो सकते हैं, यह स्लोवेनिया के डिव्जे बेब में पाई गई है। ये करीब 43,000 वर्ष पुरानी है। वैसे 2008 में जर्मनी के उल्म के पास होहल फेल्स गुहा में 35,000 वर्ष पुरानी बांसुरी भी पाई गई।कुल मिलाकर यूरोप में कई हजारों वर्ष पुरानी हड्डी से लेकर लकड़ी की बांसुरी मिलीं, जो 05 से 07 छेद वाली थीं। चीन से भी एक मकबरे से 9500 वर्ष पुरानी सारस के पंख की हड्डियों से बनी बांसुरी मिली।