चीन ने ‘एक-चीन’ नीति के लिए अपना समर्थन दोहराने को लेकर हिंदुस्तान का आह्वान किया.पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध पर, राजदूत ने बोला कि दोनों पक्षों को वार्ता जारी रखनी चाहिए और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य निवारण के लिए काम करना चाहिए.
नयी दिल्ली.चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में जारी संकट की पृष्ठभूमि में ‘एक-चीन’ नीति के लिए अपना समर्थन दोहराने के वास्ते शनिवार को हिंदुस्तान का आह्वान किया.
पिछले सप्ताह अमेरिका की प्रतिनिधिसभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर चीन के राजदूत सुन वेइदोंग की यह टिप्पणी सामने आई है.
पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध पर, राजदूत ने बोला कि दोनों पक्षों को वार्ता जारी रखनी चाहिए और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य निवारण के लिए काम करना चाहिए. उन्होंने बोला कि चीन द्विपक्षीय संबंधों को ‘‘सही रास्ते’’ पर वापस लाने के लिए कड़ी मेहनत करेगा.
उन्होंने पत्रकारों के एक समूह से कहा, ‘‘मेरा मानना है कि ‘एक चीन’ नीति को लेकर हिंदुस्तान के नजरिये में परिवर्तन नहीं आया है. हमें आशा है कि हिंदुस्तान ‘एक चीन सिद्धांत’ के लिए समर्थन दोहरा सकता है.’’
शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ‘एक-चीन’ नीति का उल्लेख करने से यह कहते हुए परहेज किया था कि ‘‘प्रासंगिक’’ नीतियों पर हिंदुस्तान का रुख भलीभांति ज्ञात है और इसकी पुनरावृत्ति की जरूरत नहीं है.
चीन ने दावा किया है कि पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद लगभग 160 राष्ट्रों ने ‘एक-चीन’’ नीति के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की है. चीन, ताइवान को अपना अलग प्रांत मानता है.