रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2022) का त्योहार भाई-बहन के अटूट संबंध का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनसे ताउम्र रक्षा का वचन मांगती हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्त्री कल्याण संस्था की स्त्रियों ने सेना के जवानों को राखी बांधकर यह त्योहार मनाया। यह संस्था पिछले 9 वर्षों से सैनिक भाइयों को राखी बांधती आई है।
अल्मोड़ा में तैनात आर्मी के ऑफिसरों और करीब 150 जवानों को इन स्त्रियों के द्वारा राखी बांधी गई। इन सैनिक जवानों से स्त्रियों ने रक्षा का वचन भी मांगा। महिलाएं पारंपरिक सेली सजाकर लेकर आई थी, जिससे जवानों की आरती उतारी गई, उन्हें टीका लगाया गया और हाथ में राखी बांधकर मुंह मीठा कराया गया। स्त्रियों ने आर्मी के जवानों की लंबी उम्र और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। स्त्रियों ने सभी आर्मी के जवानों को राखी बांधी और जवानों ने बहनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
महिला कल्याण संस्था की अध्यक्ष रीता दुर्गापाल ने बताया कि वे लोग पिछले 9 वर्षों से वीर जवानों को राखियां बांध रहे हैं। हमारे जवान जो राष्ट्र की रक्षा और हमारी रक्षा के लिए सबसे आगे रहते हैं, उनको राखी बांधना सौभाग्य की बात है। हमने उनकी लंबी उम्र और उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए 150 जवानों को राखी बांधी है। कुछ जवान जो रक्षाबंधन में घर नहीं जा पाते हैं, उन्हें यहां राखी बांधी गई है।
कुमाऊंनी परंपरा का रखा जाता है ध्यान
महिला कल्याण संस्था की उपाध्यक्ष मीता उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने अपने वीर सैनिक भाइयों को उन लोगों ने राखी बांधी है। साथ ही इस त्योहार पर कुमाऊंनी परंपरा शैली को भी जोड़ा, जिसमें वे सभी पारंपरिक सेली बनाकर लेकर आई थीं। उन्होंने बताया कि सेली आटे से बनाई जाती है और उसमें घी और रुई से बाती बनाकर आरती की जाती है। सेली से देवताओं की आरती की जाती है। उन्होंने बोला कि हमारी रक्षा करने वाले वीर सैनिक भी भगवान समान हैं