दुनिया के अनेक राष्ट्रों में लगे चीन के कैमरे
- लंदन में चीन के बीजिंग से अधिक कैमरे लगे
- अमेरिकी प्रतिबंधों का भी लाभ उठा रहा है चीन
चीन बीते कुछ समय से दुनिया का ऐसा राष्ट्र बन गया है, जिसे लेकर पूरी दुनिया ही चिंतित है. चाहे हम हिंदुस्तान की बात करें या फिर अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन की, इस मुद्दे में सभी की राय लगभग समान ही नजर आएगी. अब जो समाचार सामने आई है, वो काफी दंग कर देने वाली है. दरअसल ब्रिटिश नेता और संसद के सदस्य डैविड एल्टन ने चीन की कंपनी हांग्जो हिकविजन डिजिटल टेक्नोलॉजी को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने इसे नज़र करने वाला बताया है. एल्टन ने बोला कि राष्ट्र (ब्रिटेन) की हर गली में इस कंपनी के सर्विलांस कैमरा दिख सकते हैं.
ठीक इसी दिन ब्रिटिश वकीलों और अन्य लोगों के “पीपुल्स ट्रिब्युनल” ने शिंजियांग में उइगर मुसलमानों के विरूद्ध चीन के मानवाधिकारों के उल्लंघन को “नरसंहार” बताया है. एल्टन ने बोला कि डाटा एकत्रित करना एक ऐसी चीज है, जिसपर हम सभी को चिंता करने की आवश्यकता है. उन्होंने चिंता जताई कि ऐसा हो सकता है कि ब्रिटेन में सिक्योरिटी कैमरा के जरिए एकत्रित हुआ डाटा, अन्य राष्ट्रों में लीक होता है. हिकविजन वही कंपनी है, जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी गवर्नमेंट ने 2019 में हिकविजन से खरीदारी करना बंद कर दिया था और बाद में उन कंपनियों पर भी रोक लगा दी, जो हिकविजन के सामान का उपयोग करके उसके साथ बिजनेस करती हैं. लेकिन ये तरीका पूरे विश्व में चीनी कंपनी की बढ़त को रोक पाने में नाकाफी साबित हुए हैं.
किस शहर में कितने कैमरे लगे?
अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और अन्य संगठनों द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार, पूरे विश्व के 33,000 शहरों में 24/7 यानी दिन रात 30 लाख से अधिक हिकविजन कैमरे इंटरनेट से कनेक्टिड रहते हैं. इसी कंपनी के कैमरे लंदन में अमेरिका और यूरोपीय शहरों से भी अधिक लगे हैं. दिसंबर 2021 तक, लंदन में हिकविजन के 33,636 कैमरे लगे थे, जबकि चीन के स्वयं के शहर बीजिंग में ये संख्या 26,760 है. अन्य एशियाई शहरों की बात करें, तो दक्षिण कोरिया के सियोल में 32,067 कैमरे, वियतनाम के हो चि मिन्ह शहर में 72,269 कैमरे और थाईलैंड के बैंगकॉक में 22,274 कैमरे लगे हुए हैं. पूरे विश्व में चीन के नज़र करने वाले उपकरणों की बाढ़ आई हुई है. बहुत से कैमरे Covid-19 के संक्रमण को रोकने की आड़ में लगाए गए थे.
जापान के दाई-इची लाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी शोधकर्ता तासुकु काशिवामुरा ने चिंता जताते हुए बताया कि यह साफ नहीं है कि नेट से कनेट हुए सर्विलांस कैमरा के डाटा का उपयोग कैसे होता है. लेकिन उन्हें पूरे विश्व में फैलते चीनी कैमरों को रोकने का कोई उपाय नजर नहीं आ रहा. क्योंकि ये न सिर्फ सस्ते हैं बल्कि सरलता से उपयोग भी किए जा सकते हैं. चीन का उद्देश्य एक ऐसा बड़ा राष्ट्र बनना है, जो अर्थव्यवस्था और तकनीक दोनों ही मामलों में अमेरिका को पछाड़ना चाहता है. लेकिन यहां की जनसंख्या कम हो रही है. जिसके कारण आने वाले समय में बुजुर्गों की संख्या युवाओं से अधिक होगी. यानी वो जनसंख्या जो राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में सहयोग नहीं देगी और दूसरों पर निर्भर रहेगी. ऐसे में चीन भविष्य में आगे तक नहीं देख पा रहा है.
घरेलू इंडस्ट्री को बनाया जा रहा हाई-टेक
चीनी नेताओं का ऐसा मानना है कि घरेलू उद्योग को हाई-टेक ढंग से ट्रांसफॉर्म करके ही राष्ट्र को बड़ा बनाया जा सकता है. चीन की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं का एक पिलर सेमीकंडक्टर है. इसके उद्योग का केंद्र शंघाई शहर के उत्तर-पश्चिम में हुआन में है. चीन आगे चलकर भी सेमीकंडक्टर के क्षेत्र को पूरी तरह समर्थन देगा. वो सेमीकंडक्टर पावरहाउस बनना चाहता है. कंपनियां राष्ट्र के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके विजन के प्रति ईमानदारी दिखाने के लिए चीन को सेमीकंडक्टर पावरहाउस बनाने के अभियान में अपना सहयोग दे रही हैं. वो इसे समाज में अपनी जिम्मेदारी मान रही हैं.
अमेरिकी बाजार रिसर्चर पिचबुक के मुताबिक, चीनी चिप के स्टार्टअप्स ने 2021 में 7.7 बिलियन $ के निवेश को आकर्षित किया है. जो इससे पिछले वर्ष से लगभग दोगुना है. पूरे विश्व में इस क्षेत्र में चीनी कंपनियों का निवेश 74 प्रतिशत है, जिसमें अलीबाबा ग्रुप और टेनसेंट जैसे आईटी कद्दावर फंडिंग के प्रमुख साधन हैं. यह शी के इस संकल्प के अनुरूप है कि कम्युनिस्ट पार्टी “पूरे चीन – उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम का नेतृत्व करेगी” और राष्ट्र के तकनीकी लीडर्स को लाइन पर लाने के लिए व्यापक कोशिश करेगी. मतलब ये कि तकनीक के इस बिजनेस में कठोरता बरती जा रही है.
अमेरिकी सामान के तलाशे गए विकल्प
जिस हिकविजन कंपनी के कैमरे पूरे विश्व में लग रहे हैं, उसके वरिष्ठ उपाध्यक्ष हुआंग फांगहोंग का बोलना है कि उन्होंने कंपनी के सर्विलांस उपकरणों में उपयोग होने वाले अमेरिकी सामान के विकल्प तलाशने के लिए खूब रिसर्च की है. इसमें उन्हें काफी हद तक कामयाबी मिली है. 2020 के सर्वे से पता चलता है कि कंपनी के सर्विलांस उपकरणों में उपयोग होने वाले 60 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर अमेरिका में निर्मित थे. अब ऐसा भी बोला जा रहा है कि अमेरिका के प्रतिबंधों का चीन को एक तरह से लाभ ही हो रहा है. क्योंकि जो चीनी कंपनियां अमेरिका में बने सामान को अपने उपकरणों में उपयोग करती थीं, वो भी अब घरेलू स्तर पर बने यानी चीन में निर्मित सामान का उपयोग कर रही हैं. इससे चीन का घरेलू तकनीकी बिजनेस फल फूल रहा है.
चीन अमेरिका के प्रतिबंधों को अवसर के तौर पर देख रहा है. चीन में ऑफिसरों ने अचानक राष्ट्र के आर्थिक विकास में प्रमुख तौर पर सहयोग देने वाले इंटरनेट क्षेत्र पर नकेल कसी है. जैक मा की अलीबाबा ग्रुप जैसी बड़ी निजी कंपनियों पर या तो जुर्माना लगाया गया या फिर प्रतिबंधों की धमकी दी गई. चीन में यदि बिजनेस को गवर्नमेंट की मर्जी के बगैर चलाया जाता है, तो अधिकारी उसपर दबाव बनाने की पूरी प्रयास करते हैं.
महिला पर कर चोरी का आरोप लगाया गया
चीन में इंटरनेट कंपनियों के लिए वित्तीय क्षेत्र में कदम रखना शेर की पूंछ पर पैर रखने के बराबर है. यहां दिसंबर में विया नामक महिला, जिसे ‘लाइव कॉमर्स की क्वीन’ बोला जाता है, उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है. लाइव कॉमर्स में लाइवस्ट्रीम के जरिए सामान का प्रमोशन किया जाता है और लोगों को उसे खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है. इस स्त्री पर कर चोरी का आरोप लगाया गया और उससे जुर्माना एवं कर की वसूली सहित 1.3 बिलियन युआन मांगे गए. विया पर कार्रवाई से अलीबाबा को बड़ा झटका लगा. 2020 के आखिर से ही जिन भी इंटरनेट कंपनियों पर गवर्नमेंट को भरोसा नहीं था, उनपर नकेल कसना जारी रखा गया. शी “साझा समृद्धि” की नीति को राष्ट्र में बढ़ावा दे रहे हैं. इसके साथ ही अब कंपनियां भी गवर्नमेंट की इस पहल में बढ़ चढ़कर सहयोग दे रही हैं, ताकि वह ये साबित कर सकें कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की शत्रु नहीं हैं.