राष्ट्र और दुनिया में तीन वर्ष बाद भी कोविड-19 का खौफ बरकरार है। पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर कोविड-19 संक्रमण के मुद्दे बढ़ने लगे हैं। ऐसे में कुछ विषेषज्ञों ने चिंता जताई है कि ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट बीए.2 और बीए। 2.38 के कारण राष्ट्र में कोविड-19 के मामलों में बढोतरी हो रही है और इससे रोग की गंभीरता और रोगियों के हॉस्पिटल पहुंचने की संभावना भी बढ़ रही है।
कोरोना वायरस स्ट्रैन और जीनोमिक सीक्वेंस पर रिसर्च करने के लिए हिंदुस्तान गवर्नमेंट द्वारा गठित INSACOG -Indian SARS-CoV-2 Consortium on Genomics or Indian SARS-CoV-2 Genetics Consortium) ने बुलेटिन जारी कर बताया कि ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट बीए। 2 से उत्पन्न हुए बीए। 2.38 ने हॉस्पिटल में भर्ती होने की रेट और रोग की गंभीरता नहीं बढ़ाई है।
रोग की गंभीरता में वृद्धि होने की कोई रिपोर्ट नहीं
इन्साकॉगने बुलेटिन जारी कर बताया है कि हाल में कोविड-19 संक्रमण के कारण जो कुछ लोगों की मृत्यु हुई है उसका कारण बीए। 2.38 नहीं है बल्कि पहले से उनके किसी अन्य रोग से पीड़ित रहने के चलते मृत्यु हुई है। बुलेटिन में भारतीय सार्स-कोवी-2 जीनोमिक्स संघ (इन्साकॉग) ने बोला कि बीए.2 के कई मामलों को बीए.2.38 में वर्गीकृत किया गया है और यह उन नमूनों में उपस्थित प्रतीत होता है जिनका हाल में अनुक्रमण किया गया। इसमें बोला गया है, हालांकि, अब तक इससे हॉस्पिटल में भर्ती होने की रेट या रोग की गंभीरता में वृद्धि होने की कोई रिपोर्ट नहीं हैं।
वहीं, हाल ही में दर्ज मृत्यु के कुछ मुद्दे पहले से उस रोगी के किसी अन्य रोग से पीड़ित रहने के कारण सामने आए। Covid-19 से बचाव के लिए महत्वपूर्ण एहतियात बरतने से संक्रमण में कमी आने की आसार है और इसलिए इसका सुझाव दिया जाना जारी है। इन्साकॉग की ओर से 13 जून को एक बुलेटिन रविवार को जारी किया गया, जिसमें बोला गया है कि बीए.2 हिंदुस्तान में सबसे प्रमुख उप-स्वरूप बना हुआ है। इसने कहा, हालांकि रोग की गंभीरता के चलते हॉस्पिटल में भर्ती होने की रेट उतनी नहीं बढ़ी। इन्साकॉग मौजूदा स्थिति पर करीबी नज़र रख रहा है। इन्साकॉग ने 30 मई को एक अन्य बुलेटिन में बोला था कि हिंदुस्तान में तब तक बीए.4 के पांच मुद्दे और बीए.5 के तीन मुद्दे सामने आये थे