Supreme Court On Azam Khan: सपा नेता आज़म खान (Azam Khan) पर उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक दर्ज हो रहे मुकदमों पर उच्चतम न्यायालय ने अहम टिप्पणी की है। न्यायालय ने बोला है, “एक मुद्दे में जमानत मिली तो नया मुकदमा दर्ज हो गया। किसी पर 1-2 मुकदमे दर्ज हों, तो इसे समझा जा सकता है। लेकिन यहां एक के बाद एक 89 मुकदमा दर्ज किए गए हैं। इसके चलते वह आदमी 2 वर्ष से कारागार में है।” कल आज़म खान को एक मुद्दे में उच्च न्यायालय से जमानत मिली थी, लेकिन नया मुकदमा दर्ज हो जाने के चलते वह बाहर नहीं आ सके हैं। इसी पर उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी की है।
जस्टिस एल नागेश्वर राव और बी आर गवई की बेंच इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश के लिए पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा, “यह एक गलत धारणा है। हम इस धारणा को दूर करने के लिए हलफनामा दाखिल करेंगे।” उच्चतम न्यायालय ने इसकी अनुमति देते हुए सुनवाई मंगलवार, 17 मई के लिए स्थगित कर दी है।
इससे पहले 6 मई को हुई सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने आज़म खान की जमानत पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 5 महीने से आदेश लंबित होने पर कठोर टिप्पणी की थी। उच्चतम न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का मज़ाक बताया था।
जस्टिस एल नागेश्वर राव और बी आई गवई की बेंच ने बोला था, “आदेश सुरक्षित रखने का क्या मतलब है? 137 दिन से आदेश नहीं आया। यह न्यायिक प्रक्रिया का मज़ाक है। आरोपी को 86 मामलों में जमानत मिल चुकी है। 1 मामला रुका है। हम इससे ज़्यादा अभी कुछ बोलना नहीं चाहते।” जजों ने सुनवाई बुधवार, 11 मई के लिए टालते हुए बोला था “हम उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा करना चाहते हैं। ज़रूरी हुआ तो आदेश देंगे।”
क्या है मामला?
जेल में रहते हुए उत्तर प्रदेश के रामपुर से विधायक चुने गए आजम खान फरवरी, 2020 से कारागार में बंद है। उनके ऊपर लगभग 90 आपराधिक मुकदमा है। यह मुकदमा उत्तर प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त केंद्रीय एजेंसियों ने भी दर्ज किए हैं। उनकी याचिका में बताया गया था कि 86 मामलों में उन्हें जमानत मिल गई है। लेकिन उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष दिसंबर से एक मुद्दे में जमानत पर आदेश सुरक्षित रखा हुआ है। कई बार आवेदन देने के बावजूद आदेश नहीं दिया गया है।
जमानत के बाद भी नहीं मिली राहत
मंगलवार को उच्च न्यायालय ने ज़मानत के लिए बचे अंतिम मुद्दे में भी आज़म को अर्ज़ी स्वीकार कर ली। यह मामला दुश्मन संपत्ति पर गैर कानूनी कब्जे का था। लेकिन इससे पहले ही एक नए मुद्दे का वारंट सीतापुर कारागार पहुंच गया। यह मामला फ़र्ज़ी दस्तावेजों के ज़रिए 3 विद्यालयों को मान्यता दिलवाने से जुड़ा है। इसके चलते अब इस मुद्दे में भी ज़मानत लेना आज़म के लिए ज़रूरी हो गया है। आज इसकी जानकारी मिलने पर उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट की मंशा पर प्रश्न उठाए।