अक्टूबर 2023 से मध्य पूर्व में लगी हुई आग और भी अधिक भड़क रही है और इसका केंद्र इजराइल में है। इजराइल के गाजा में हमास के खिलाफ युद्ध छेड़ने के पश्चात, उसे कई मिलिशिया ग्रुप से चुनौतियों को भी झेलना पड़ गया। इसके पश्चात उसने हमास के साथ-साथ हिजबुल्लाह, हूती और ईरान से भी लौहा लिया था। खबरों का बोलना है कि हमास, हिजबुल्लाह और हूती को ईरान ही सहायता प्रदान करता है, इसके कारण से ईरान इजराइल का शत्रु नंबर 1 बन चुका है।
इजराइल पूरे गाजा युद्ध के बीच 2 बार ईरान पर अटैक भी कर चुका है। वहीं अमेरिका ने भी इजराइल को कमजोर करने के लिए कड़े से कड़े प्रतिबंध भी लगा डाले है, फिर भी ईरान कमजोर नहीं हुआ और इजराइल को समाप्त करने की कसम खाता रहा है। यदि अमेरिका सीधी जंग में इजराइल की सहायता कर भी दे तो क्या ईरान को हरा देगा? आइये जानते हैं, तो चलिए जानते है इस बारें में विस्तार से…
इजराइल vs ईरान: ईरान की जनसंख्या इजराइल से 10 गुना अधिक है। ग्लोबल इंडेक्स के मुताबिक ईरान की जनसंख्या 8,75,90,873 है। वहीं इजराइल की जनसंख्या 90,43,387 है। खबरों का बोलना है कि ईरानी सशस्त्र बल पश्चिम एशिया क्षेत्र में सबसे बड़ी फोर्स में से हैं, जिनमें कम से कम 5,80,000 सक्रिय-ड्यूटी सैनिक और लगभग 200,000 रिजर्व कर्मी हैं, जो पारंपरिक सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में बंट चुके है। इसकी तुलना इजराइल के साथ की जाए तो, उसके पास सेना, नौसेना और अर्धसैनिक बलों में 1,69,500 एक्टिव सैन्यकर्मी हैं। इसके साथ साथ 4,65,000 इसके रिजर्व सैनिक हैं, जबकि 8,000 अर्धसैनिक बल भी उपस्थित है।
रक्षा बजट में इजराइल है सबसे आगे: हालांकि, जब रक्षा खर्च के बारें में बात आती है तो इजराइल ईरान से कही अधिक रक्षा पर खर्च कर देता है। इसको इस खर्च के लिए अमेरिकी से भी बड़ी सहायता प्रदान की जा रही है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के डेटा के मुताबिक इजराइल का डिफेंस बजट 24 बिलियन $ है जबकि ईरान का महज 9.95 बिलियन $ हो चुका है।खबरों का बोलना है कि वाशिंगटन स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) ने अपनी रिपोर्ट में इस बारें में बोला गया है कि ईरान की सेना केवल गवर्नमेंट के बजट पर बिलकुल भी निर्भर नहीं करता, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC)। FDD ने इस बारें में बोला है IRGC ईरान में कई कंपनियों का संचालन करने का काम भी कर रही है और ईरान की अर्थव्यवस्था पर अच्छी पकड़ रख रही है।
हथियार में आखिर कौन किस्से आगे?: ईरान भले ही सैनिकों के मुकदमा में इजराइल से आगे निकल रहे है, लेकिन हथियारों के मुकदमा में इजराइल हर किसी से आगे है। इजराइल के पास एडवांस और नए जमाने के लिए सबसे खतरनाक हथियार है, जिनमें अधिकांश उसने अमेरिका से लिए हैं या अमेरिका की सहायता से तैयार कर दिए गए है।
इजराइल की एयर अटैक पावर ईरान से कई गुना अधिक है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स से पता चल जाता है कि इजराइल के पास कुल 612 फाइटर जेट भी है, जबकि ईरान के पास 551 हैं। एक अहम् पहलू यह है कि इजराइल की वायु सेना में F-15s, F-16s और F-35s जैसे सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन ईरान के मुकदमा में ऐसा बिलकुल भी नहीं है। इजराइल के पास मशहूर बहु-स्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली भी है, इसमें आयरन डोम , डेविड स्लिंग, एरो और पैट्रियट शामिल हैं। जबकि ईरान के पास रूस से लिए हुए एयर डिफेंस भी है।
हालांकि ईरान की मिसाइल शक्ति का कोई भी मुकाबला नहीं है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने इस बारें में जानकारी दी है कि ईरान के पास पश्चिम एशिया में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का सबसे बड़ा जखीरा भी देखने के लिए मिल रहा है, इसमें क्रूज मिसाइलें और एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं, साथ ही 2,000 KM तक की रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलें भी यहाँ शामिल है। इनमें इजराइल सहित किसी भी लक्ष्य को भेदने की क्षमता और रेंज है।
जमीनी ताकत आखिर किसकी अधिक है?: यदि ज़मीनी ताकत के बारें में बात की जाए तो इजराइल के पास 1,370 टैंक हैं जबकि ईरान के पास 1,996 हैं। इजराइल से अधिक टैंक होने का मतलब यह नहीं है कि वह सैन्य रूप से अधिक शक्तिशाली है। क्योंकि इजराइल के पास आधुनिक टैंक हैं, इनमे मर्कवा टैंक जैसे एडवांस टैंक शामिल हैं, जिन्हें विश्व में सबसे बेहतरीन डिजाइन और भारी बख्तरबंद बोला जाता है।