पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को 2015 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) गवर्नमेंट के अनुसार स्थापित केंद्र गवर्नमेंट के थिंक टैंक नीति आयोग को समाप्त करने की मांग की. वार्षिक योजनाएं वापस लाई जाएं. पीएम मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक में शामिल होने से एक दिन पहले बनर्जी ने राजधानी में बोला कि इस नीति आयोग को रोकें. यह बैठकें बुलाने के अतिरिक्त कुछ नहीं करता. योजना आयोग को वापस लाओ. यह पूछे जाने पर कि वह अपने कुछ गठबंधन सहयोगियों के उल्टा नीति आयोग की बैठक में क्यों भाग ले रही हैं, जिन्होंने बहिष्कार का निर्णय किया है. बनर्जी ने बोला कि आने की कोई आवश्यकता नहीं है और मैंने उनके बजट के कारण अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया था. लेकिन अभिषेक और अन्य ने मुझे इंकार लिया और मैंने हेमंत (सोरेन) से भी बात की, जो आ रहे हैं.
उन्होंने उत्तर बंगाल पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार की टिप्पणी का जिक्र करते हुए बोला कि परेशानी समन्वय की है। हर राज्य की अपनी प्राथमिकताएँ होती हैं, लेकिन मैं संघवाद में विश्वास करता हूँ. बीजेपी राष्ट्र को तोड़ना चाहती है. उनके नेता बांटने की बात कर रहे हैं. मजूमदार ने बुधवार को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रस्ताव दिया था कि उत्तरी पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ समानता के कारण, क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिक विकास निधि की सुविधा के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के अनुसार शामिल किया जाए.
उन्होंने बोला कि यदि बीजेपी लोगों के निर्णय को नहीं सुनती है, तो यह उनकी पसंद है. विपक्ष शासित सभी राज्य वंचित हैं. आप अपने दोस्तों को विशेष पैकेज दे सकते हैं, लेकिन दूसरों को वंचित नहीं कर सकते. ममता बनर्जी ने एक बार फिर एनडीए गवर्नमेंट के अस्तित्व पर प्रश्न उठाते हुए बोला कि मुझे विश्वास नहीं है कि वे कितने समय तक रहेंगे लेकिन जब तक वे सत्ता में हैं तब तक उन्हें लोगों के लिए काम करने दें.