देश का केंद्रीय बजट महीने के अंतिम हफ्ते में 23 जुलाई को पेश होने वाला है. इस बजट से व्हीकल टायर मैनुफैक्चरर्स भी काफी उम्मीदें हैं. वाहन टायर विनिर्माता संघ (एटीएमए) ने मंगलवार को बोला कि हिंदुस्तान में कबाड़ टायर के आयात (इम्पोर्ट) पर रोक लगाने की आवश्यकता है. निकाय ने बोला कि राष्ट्र कबाड़ टायर का ‘डंपिंग ग्राउंड’ बनता जा रहा है. भाषा की समाचार के मुताबिक, एटीएमए ने वित्त मंत्रालय को अपनी बजट-पूर्व अनुशंसाओं में बोला कि वित्त साल 2020-21 के बाद से हिंदुस्तान में बेकार/कबाड़ टायर का आयात पांच गुना से अधिक बढ़ गया है.
घरेलू स्तर पर टायर का विनिर्माण सालाना 20 करोड़ से अधिक
खबर के मुताबिक, इसमें बोला गया कि कबाड़ टायर का ऐसा ताबड़तोड़ आयात न केवल पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है, बल्कि यह विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) विनियमन के उद्देश्य को भी कमजोर करता है. यह नियम जुलाई, 2022 से लागू है. एटीएमए के चेयरमैन अर्नब बनर्जी ने चिंता जाहिर करते हुए बोला कि हिंदुस्तान में बेकार/कबाड़ टायर के आयात पर नीतिगत तरीकों के जरिये रोक लगाने की आवश्यकता है. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान दुनिया में अग्रणी टायर विनिर्माताओं में से एक के रूप में उभरा है, जहां घरेलू स्तर पर टायर का विनिर्माण सालाना 20 करोड़ से अधिक पर पहुंच गया है. इसलिए राष्ट्र में पर्याप्त घरेलू एंड ऑफ लाइफ टायर (ईएलटी) क्षमता मौजूद है.
प्राकृतिक रबड़ (एनआर) के शुल्क मुक्त आयात की भी मांग
इंडस्ट्री की तरफ से एटीएमए ने अपनी बजटीय अनुशंसा में राष्ट्र में घरेलू मांग-आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए प्राकृतिक रबड़ (एनआर) के शुल्क मुक्त आयात की भी मांग की है. इसमें बोला गया कि घरेलू स्तर पर निर्मित प्राकृतिक रबड़ की अनुपलब्धता के कारण टायर उद्योग की करीब 40 फीसदी प्राकृतिक रबड़ की आवश्यकता आयात से पूरी होती है. हिंदुस्तान में प्राकृतिक रबड़ के आयात पर शुल्क की उच्चतम रेट उद्योग की प्रतिस्पर्धी क्षमता को प्रभावित करती है. एटीएमए ने टायर के प्रमुख कच्चे माल, प्राकृतिक रबड़ पर उलट शुल्क ढांचे के मामले को अहमियत के आधार पर हल करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया.
इसमें दावा किया गया कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के अनुसार टायर पर मूल सीमा शुल्क 10-15 फीसदी है, जबकि राष्ट्र में टायर का आयात और भी कम शुल्क (तरजीही शुल्क) पर किया जाता है. इसके प्रमुख कच्चे माल, यानी प्राकृतिक रबड़ पर मूल सीमा शुल्क बहुत अधिक (25 फीसदी या 30 रुपये प्रति किलोग्राम, जो भी कम हो) है.