Secretary General Of The Lok Sabha: अठारहवीं लोकसभा के पहले सत्र के पहले दिन सोमवार (24 जून) को प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने सदन की कार्यवाही प्रारम्भ कराई। उन्होंने ही सदन के नए सदस्यों को शपथ दिलाई। पीएम मोदी ने सबसे पहले सांसद के रूप में शपथ ली। लोकसभा में एक अधिकारी की पुकार सुनने के बाद सांसदों को शपथ के लिए आगे बढ़ते हुए देखा जा रहा था।
लोकसभा में सांसदों का शपथ ग्रहण देखने वाले ज्यादातर लोगों को मन में प्रश्न लाजिमी है कि आखिर ये कद्दावर ब्यूरोक्रेट कौन हैं, जिनकी पुकार सुनने के बाद कोई भी सांसद बिना देरी के आगे बढ़ने लगते हैं। आइए, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी समेत सभी सांसदों को शपथ के लिए पुकार लगाने वाले इस सीनियर अधिकारी के बारे में जानते हैं।
कौन हैं लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह?
दरअसल, यह अधिकारी लोकसभा महासचिव हैं। इन्हें 1 दिसंबर 2020 से कैबिनेट सचिव की रैंक और दर्जे में लोकसभा सचिवालय और लोकसभा के महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। इनका नाम उत्पल कुमार सिंह है। यह 1986 बैच और उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने उत्पल कुमार सिंह को लोकसभा सेक्रेटरी जनरल के पद पर एक वर्ष का एक्सटेंशन दिया था।
35 से अधिक सालों के प्रशासनिक अनुभव वाले उत्पल कुमार सिंह ने केंद्र और राज्य सरकारों में अर्थव्यवस्था और शासन के विभिन्न क्षेत्रों में कई प्रमुख पदों पर काम किया है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के भरोसेमंद और मजबूत ऑफिसरों में गिने जाने वाले उत्पल कुमार सिंह को अब तक दो बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है।
सांसदों को सदन के सदस्य की शपथ दिलाने की प्रक्रिया
लोकसभा महासचिव की ओर शपथ ग्रहण के लिए संसद सदस्यों के नाम पुकारे जाने पर सांसद तय स्थान पर खड़े होकर प्रोटेम स्पीकर के माध्यम से पद और गोपनीयती की शपथ लेते हैं। संसद के सदस्य अपना नाम पुकारे जाने के बाद जहां बैठे होते हैं, वहां से उठकर लोकसभा महासचिव की मेज की दाईं ओर आकर खड़े हो जाते हैं। इसके बाद महासचिव नए सदस्य को उनकी तय भाषा में शपथ के फॉर्मेट की कॉपी देते हैं। फिर प्रोटेम स्पीकर के कहने पर सांसद शपथ ग्रहण करते हैं।
सदन के नेता यानी प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, सभापति।। शपथ का तय क्रम
सदन के नेता यानी प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, सभापति समेत सभी सांसदों को एक तय क्रम के अनुसार शपथ लेने के लिए पुकारा जाता है। उनके बाद राज्यवार बाकी सदस्यों को बुलाया जाता है। नियम के मुताबिक, आखिर में सदन के उन सदस्यों के नाम फिर से पुकारे जाते हैं, जो पहले चरण में शपथ लेने के लिए उपस्थित नहीं होते हैं। वैसे निचले सदन के सदस्यों की संख्या 543 है। इसलिए आमतौर पर दो दिनों में शपथ की प्रक्रिया पूरी हो पाती है।