भारत ने अपनी सीमा के पास म्यांमा की सेना और सेना शासन विरोधी समूहों के बीच लड़ाई को रोकने का आह्वान किया, जिससे मिजोरम में पड़ोसी राष्ट्र के शरणार्थियों की आमद बढ़ गई है। पिछले कुछ हफ्तों में हिंदुस्तान से सटी सीमा के पास कई प्रमुख कस्बों और क्षेत्रों में म्यांमा के सेना शासन विरोधी समूहों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष बढ़ गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भारत-म्यांमा सीमा के निकट अत्याचार की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बोला कि लड़ाई के परिणामस्वरूप, भारत-म्यांमा सीमा पर पड़ोसी राष्ट्र के नागरिकों की भारतीय सीमा में आवाजाही बढ़ी है। बागची ने बोला कि हम अपनी सीमा के करीब ऐसी घटनाओं से बहुत चिंतित हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि म्यांमार की आंतरिक कलह हिंदुस्तान के लिए चिंता का कारण क्यों है? इसके अलावा, म्यांमार में वास्तव में क्या हो रहा है?
‘ऑपरेशन 1027’ और जुंटा की प्रतिक्रिया
27 अक्टूबर को थ्री ब्रदरहुड एलायंस अराकान आर्मी, म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी और ताआंग नेशनल लिबरेशन आर्मी शामिल थे। उसने चीन की सीमा से लगे म्यांमार के उत्तरपूर्वी शान राज्य में ऑपरेशन 1027 प्रारम्भ किया। रखाइन राज्य में भी एक साथ हमले हुए। उनकी मांग लोकतंत्र की बहाली के लिए है जो फरवरी 2021 में तख्तापलट में सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से नष्ट हो गया है। वास्तव में, उन्होंने आक्रामक आरंभ में एक बयान जारी किया। इसमें बोला गया कि ऑपरेशन हमारी सामूहिक ख़्वाहिश से प्रेरित था नागरिकों के जीवन की रक्षा करना, आत्मरक्षा के अपने अधिकार का दावा करना, अपने क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना और म्यांमार सेना की ओर से चल रहे तोपखाने हमलों और हवाई हमलों का दृढ़ता से उत्तर देना। रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार सेना ने कई शहरों और 100 से अधिक सुरक्षा चौकियों पर नियंत्रण खो दिया है, जिसके कारण चीनी सीमा के पास आठ टाउनशिप में मार्शल लॉ की घोषणा की गई है। जातीय सशस्त्र समूहों ने कहा कि शान राज्य में म्यांमार सेना की एक पूरी बटालियन ने सेरेण्डर कर दिया है और वे जल्द ही क्षेत्र के प्रमुख शहर लाउक्किंग पर कब्जा कर लेंगे। आक्रामक आरंभ करने के बाद से थ्री ब्रदरहुड एलायंस ने जीत का दावा किया है।
भारत को कैसे करेगा प्रभावित
यह सारी लड़ाई और अत्याचार हिंदुस्तान को कैसे प्रभावित करती है? विद्रोही भारतीय सीमा के करीब लड़ रहे हैं। हाल ही में 14 नवंबर को सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के एसोसिएट फेलो अंगशुमन चौधरी ने एक्स पर पोस्ट किया था कि म्यांमार में उपद्रवियों ने भारतीय सीमा के साथ दो शहरों चिन में रिखावदार और सागांग क्षेत्र में खमपत पर कब्जा कर लिया है। ये दोनों शहर हिंदुस्तान के व्यापार मार्गों के लिए जरूरी हैं। लेकिन हिंदुस्तान की चिंता केवल कब्ज़ा किये गये शहरों तक ही सीमित नहीं है। जरूरी बात यह है कि आक्रामक चिन राज्य के आसपास केंद्रित है। चिन उपद्रव को मिज़ोरम में क्षेत्रीय लोगों का समर्थन प्राप्त था, आंशिक रूप से घनिष्ठ जातीय संबंधों के कारण, और म्यांमार के हजारों लोगों ने अपदस्थ राज्य और संघीय सांसदों सहित छोटे भारतीय राज्य में शरण मांगी। वहां के उपद्रवियों के मिजोरम के क्षेत्रीय लोगों के साथ घनिष्ठ जातीय संबंध हैं। मिज़ो लोगों के म्यांमार के चिन समुदाय के साथ संबंध हैं, और इससे उनकी आमद हुई है। वे चिंतित हैं कि आमद राज्य में गतिशीलता को बदल देगी और राज्य में युद्धरत मेइतेई और कुकी के बीच संघर्ष को और बढ़ा देगी। रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार से कम से कम 5,000 लोग मिजोरम में प्रवेश कर चुके हैं। मिजोरम पुलिस ने बोला कि 5,000 से अधिक लोगों ने म्यांमार सीमा के साथ मिजोरम के दो गांवों में शरण ली है। नमें से आठ को बेहतर चिकित्सा इलाज के लिए आइजोल ले जाया गया है और बाकी का उपचार चम्फाई में किया जा रहा है।