India China Tension: हिंदुस्तान और चीन के संबंध काफी समय से खराब चल रहे हैं। विस्तारवादी नीति के कारण चीन दुनिया की आंखों में अब खटकने लगा है। कभी वह साउथ चाइना सी पर दावा ठोकता है तो कभी ताइवान को लेकर दूसरे राष्ट्रों से झगड़ा कर लेता है। अब मोदी सरकार ताइवान के मसले पर ही चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी में है। दरअसल, हिंदुस्तान ताइवान से करीबी बढ़ा रहा है और अगले महीने की आरंभ तक वहां एक लाख वर्कर्स को भेजने जा रहा। हिंदुस्तान के इस कदम से चीन का पारा बढ़ने की पूरी आशा जताई जा रही है। ऑफिसरों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ताइवान कारखानों, खेतों और अस्पतालों में काम करने के लिए 1,00,000 से अधिक हिंदुस्तानियों को काम पर रख सकता है। लोगों ने बोला कि दोनों पक्षों द्वारा दिसंबर की आरंभ में रोजगार गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर करने की आशा है। ताइवान के बूढ़े होते समाज का मतलब है कि उसे अधिक मजदूरों की जरूरत है।
सुपर एज्ड समाज बनने वाला है ताइवान
अनुमान है कि ताइवान 2025 तक सुपर एज्ड समाज बन जाएगा, जहां जनसंख्या के पांचवें हिस्से से अधिक बुजुर्ग लोगों की संख्या होने का अनुमान है। रोजगार समझौते से चीन के साथ भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की आसार है, जो ताइवान के साथ किसी भी आधिकारिक आदान-प्रदान का विरोध करता है। ताइवान को चीन अपना बताता रहा है। चीन और ताइवान के बॉर्डर के बीच में समुद्र का पानी है, जबकि चीन हिंदुस्तान के साथ हिमालयी सीमा साझा करता है। यह पिछले दो दशकों से हिंदुस्तान के आयात का शीर्ष साधन भी रहा है। हालांकि, ताइवान के साथ समझौता यह नहीं दिखता है कि हिंदुस्तान वन चाइना पॉलिसी को त्याग रहा है (एक ऐसी स्थिति जो द्वीप को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता देती है)। हालांकि, नयी दिल्ली ने सार्वजनिक दस्तावेजों में उस स्थिति को दोहराया नहीं है और इसके बजाय ताइवान के साथ एक एक्टिव अनौपचारिक संबंध को बढ़ावा दिया है।
बातचीत के आखिरी फेज में है यह समझौता
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, भारत-ताइवान जॉब समझौता अब वार्ता के आखिरी चरण में है। ब्लूमबर्ग न्यूज द्वारा संपर्क किए जाने पर ताइवान के श्रम मंत्रालय ने हिंदुस्तान सौदे पर विशेष रूप से कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन बोला कि वह उन राष्ट्रों के साथ योगदान का स्वागत करता है जो उसे मजदूर प्रदान कर सकते हैं। ताइवान में बेरोजगारी रेट 2000 के बाद से सबसे निचले स्तर पर गिर गई है। गवर्नमेंट को 790 अरब $ की अर्थव्यवस्था को चालू रखने के लिए मजदूरों की जरूरत है। लोगों ने बोला कि सौदे को बेहतर बनाने के लिए ताइवान भारतीय कामगारों को क्षेत्रीय लोगों के बराबर वेतन और बीमा पॉलिसियों की पेशकश कर रहा है, जबकि अन्य राष्ट्रों के साथ भी नयी दिल्ली ने समझौते किए हैं।
कई राष्ट्रों के साथ हिंदुस्तान ने किए ऐसे समझौते
भारत गवर्नमेंट वृद्ध कार्यबल का सामना कर रहे विकसित राष्ट्रों के साथ रोजगार समझौते पर बल दे रही है। हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने जापान, फ्रांस और यूके सहित 13 राष्ट्रों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और नीदरलैंड, ग्रीस, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड के साथ इसी तरह की प्रबंध पर चर्चा कर रही है। 2020 में सीमा पर झड़प के बाद से हिंदुस्तान और चीन के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं, जो चार दशकों में अब तक का सबसे खराब मुद्दा है। तब से दोनों राष्ट्रों ने हजारों सैनिकों, तोपखाने बंदूकों और टैंकों को हिमालय क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया है। पिछले वर्ष पद छोड़ने वाले तीन पूर्व भारतीय सेना प्रमुखों ने इस वर्ष एक सुरक्षा सम्मेलन के लिए ताइवान का दौरा किया जिस यात्रा पर बीजिंग ने विरोध जताई। ताइवान और हिंदुस्तान के बीच 2018 में एक निवेश प्रोत्साहन समझौता भी हुआ है।