महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने तेज होते मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच राज्य की स्थिति पर चर्चा के लिए बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया है। मराठा आंदोलन ने राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसक रूप ले लिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने बोला कि शिंदे विपक्षी नेताओं को स्थिति से निपटने के लिए गवर्नमेंट की योजनाओं से अवगत कराएंगे और उनका समर्थन मांगेंगे।
पिछले कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों में अत्याचार की घटनाएं देखी गई हैं।
मराठवाड़ा के पांच जिलों में सरकारी बस सेवाएं पूरी तरह से निलंबित कर दी गई हैं, जबकि बीड के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट बंद कर दिया गया है, जहां प्रदर्शनकारियों ने सियासी दलों के नेताओं के आवासों को निशाना बनाया था।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अत्याचार नहीं करने की अपील की है और सियासी दलों से भी ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल होने से बचने को बोला है जिससे स्थिति खराब हो।
महाराष्ट्र गवर्नमेंट ने मंगलवार को एक आदेश प्रकाशित कर संबंधित ऑफिसरों से पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों को नए कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने को कहा, ताकि उनके लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के अनुसार आरक्षण फायदा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
सरकारी प्रस्ताव (जीआर) में ऑफिसरों से कुनबियों के संदर्भ वाले और उर्दू तथा ‘मोड़ी’ लिपि (जिसका इस्तेमाल पहले के समय में मराठी लिखने के लिए किया जाता था) में लिखे पुराने दस्तावेजों का अनुवाद करने के लिए कहा।
इन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, प्रमाणित किया जाएगा और फिर सार्वजनिक रूप से मौजूद कराया जाएगा।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब सीएम शिंदे ने बोला कि गवर्नमेंट द्वारा नियुक्त समिति ने 1.72 करोड़ पुराने दस्तावेजों (निजाम-काल सहित) की जांच की और उनमें से 11,530 ऐसे रिकॉर्ड पाए गए जहां कुनबी जाति का उल्लेख किया गया है।
कृषि से जुड़ा कुनबी समुदाय महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी के भीतर आता है और समुदाय को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण फायदा मिलता है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मंगलवार को बोला कि सीएम शिंदे द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उनकी पार्टी के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को आमंत्रित नहीं किया गया है।
राउत ने राज्य गवर्नमेंट की निंदा करते हुए बोला कि महाराष्ट्र जल रहा है और शिंदे के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट ‘‘शर्मनाक राजनीति’’ का सहारा ले रही है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ऐसे दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है जिनका सिर्फ़ एक विधायक है या जिनके पास कोई विधायक नहीं है। लेकिन 16 विधायकों और छह सांसदों वाली पार्टी को निमंत्रण नहीं दिया गया है क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) उनकी आंखों की किरकिरी बन गई है।’’
ठाकरे के करीबी सहयोगी राज्यसभा सदस्य ने बोला कि उनकी पार्टी को किसी सम्मान की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वह चाहते हैं कि मराठा आरक्षण के लंबित मामले का जल्द निवारण हो।
जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मंगलवार को बोला कि मराठा समुदाय ‘‘अधूरा आरक्षण’’ स्वीकार नहीं करेगा और महाराष्ट्र गवर्नमेंट को इस परेशानी पर राज्य विधानमंडल का एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए।
उन्होंने धमकी दी कि यदि मराठा समुदाय को ‘‘पूर्ण’’ कोटा नहीं दिया गया तो वह बुधवार शाम से पानी पीना बंद कर देंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा पूर्व में जारी एक बयान के अनुसार, जरांगे ने बुधवार सुबह शिंदे के साथ ‘‘संतोषजनक’’ चर्चा के बाद पानी पीना प्रारम्भ कर दिया।
जरांगे ने 25 अक्टूबर को दूसरी बार अनशन प्रारम्भ किया था।
जरांगे ने बोला कि गवर्नमेंट को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे मराठा युवाओं को ‘‘परेशान’’ नहीं करना चाहिए, वरना कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।
उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की निंदा की जिन्होंने बोला है कि बीड में अत्याचार के अपराधियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के अनुसार आरोपों का सामना करना पड़ेगा।
जरांगे ने मराठवाड़ा क्षेत्र में मराठा लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देने के राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की।