सोमवार को जारी पांच पन्नों के निर्णय में राज्य न्यायालय ने ट्रंप के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उनके संवैधानिक अधिकारों को कुचल दिया गया था. न्यायालय का यह विशेष रूप से एक त्वरित फैसला था, जो ट्रंप की कानूनी टीम द्वारा फुल्टन काउंटी के जिला अटॉर्नी फानी विलिस को उनके विरूद्ध आरोप पंजीकृत करने से रोकने के लिए शुक्रवार को याचिका पंजीकृत करने के तीन दिन बाद आया है. विलिस ने 2021 से ट्रंप पर उन आरोपों की जांच की है कि जिसमें उनके विरूद्ध राष्ट्रपति चुनाव परिणामों को पलटने की प्रयास का आरोप है. इसमें दिखाया गया था कि रिपब्लिकन सत्ताधारी राज्य में डेमोक्रेट जो बाइडेन से हल्की अंतर से हार रहे थे.
ट्रंप ने की थी जांच को रोकने और रिपोर्ट को रद्द करने की मांग
ट्रंप ने इन आरोपों के संबंध में विलिस द्वारा केस चलाने की क्षमता को सीमित करने के अतिरिक्त जांच को रोकने समेत विशेष ग्रैंड जूरी की उस रिपोर्ट को रद्द करने की भी मांग की गई है, जिसे अभी तक पूरी तरह से जारी नहीं किया गया है. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार के अपने इस निर्णय में ट्रंप की इन मांगों को भी खारिज कर दिया है. उच्चतम न्यायालय के नौ सदस्यीय पैनल ने लिखा, “याचिकाकर्ता ने यह नहीं दिखाया है कि वह उस राहत का हकदार होगा जो वह चाहता है.” न्यायालय ने बोला कि ट्रंप ने विलिस की अयोग्यता को साबित करने के लिए “दोनों में से कोई भी आवश्यक कानून के तथ्य” प्रस्तुत नहीं किए थे. ट्रंप ने याचिका में अपने अधिकारों का उल्लंघन होने की भी बात लिखी थी.
कोर्ट ने कहा- नहीं हुआ ट्रंप के अधिकारों का उल्लंघन
कोर्ट ने अपने निर्णय में बोला है कि “प्रतिवादी के संवैधानिक अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ और ग्रैंड जूरी प्रक्रिया में कोई संरचनात्मक गुनाह नहीं हुआ”, जिससे ग्रैंड जूरी की रिपोर्ट को दबाने या खारिज करने का कोई आधार नहीं बचता. पूर्व राष्ट्रपति के विरूद्ध कार्यवाही में तेजी तब आई, जब ट्रंप की कानूनी टीम ने राज्य में अपेक्षित कानूनी कार्यवाही को रोकने का कोशिश किया. विलिस ने पहले फुल्टन काउंटी के शेरिफ को लिखे एक पत्र में बोला था कि वह इस वर्ष 11 जुलाई से 1 सितंबर के बीच किसी भी आरोप की घोषणा करेंगी. यह खुलासा इसलिए किया गया. ताकि शेरिफ को एक हाई-प्रोफाइल परीक्षण की सुरक्षा जरूरतों के लिए तैयारी करने का समय मिल सके. ट्रंप की कानूनी टीम ने बोला कि पत्र ने उनकी याचिका को विशेष रूप से “तत्काल” बना दिया है. हालांकि यह भी स्वीकार किया कि जॉर्जिया हाई कोर्ट के हस्तक्षेप का निवेदन करना एक दूर की कौड़ी थी.