Modi Surname Defamation Case: मोदी सरनेम मानहानि मुद्दे में राहुल गांधी की याचिका पर उच्चतम न्यायालय 21 जुलाई को सुनवाई करेगा। राहुल गांधी ने अपनी याचिका में दोषी ठहराए जाने के निर्णय पर रोक की मांग की है। सोमवार को राहुल गांधी की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच से याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। इस पर चीफ जस्टिस ने शुक्रवार को सुनवाई की बात कही।
इससे पहले गुजरात उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की दोषी सिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल हो सके, इसके लिए ज़रूरी है कि उनको दोषी ठहराए जाने के निर्णय पर भी रोक लगे। अभी केवल सेशन न्यायालय से उनकी सज़ा निलंबित है
राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका में बोला है कि उनका बयान एक विशुद्ध सियासी बयान था। उन्होंने पूर्णेश मोदी या किसी आदमी विशेष की मानहानि नहीं की है। यदि इस तरह के मामलों में भी उन्हें दोषी ठहराया जाता है और इस निर्णय को आगे बरकरार रखा जाता है तो यह अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोटने जैसा होगा और इस तरह के आदेश लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करेंगे।
सेशन न्यायालय और HC से राहत नहीं मिली
23 मार्च 2023 को भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी की कम्पलेन पर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट , सूरत न्यायालय ने राहुल गांधी को दोषी ठहराते हुए उन्हें दो वर्ष की सज़ा सुनाई थी। इसी निर्णय के चलते उनकी संसद सदस्यता भी चली गई, यही नहीं वो सज़ा की अवधि पूरी करने के बाद अगले 6 वर्ष तक यानि 2031 तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य हो गए।
इसके बाद अप्रैल में राहुल गांधी ने इस निर्णय के विरूद्ध सेशन न्यायालय का रुख किया। सेशन न्यायालय ने राहुल गांधी को अपील पेंडिंग रहने तक ज़मानत तो दे दी लेकिन दोषी ठहराए जाने के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस निर्णय को राहुल गांधी ने गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी लेकिन उच्च न्यायालय ने भी दोषी ठहराए जाने के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया
क्या बोला था गुजरात HC ने?
गुजरात उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करते हुए बोला था कि राहुल गांधी पर आरोप किसी आदमी विशेष की मानहानि करने का न होकर, समाज के एक बड़े तबके की मानहानि का है। समाज का एक बड़ा तबका उनके बयान से प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी राष्ट्र की सबसे पुरानी पार्टी के बड़े नेता है। जाहिर है, उनकी पहुंच के चलते उनका बयान समाज के बड़े तबके तक जाता है। उनसे आशा की जाती थी कि वो सावधानी बरतें और कोई ऐसा बयान न दें जिससे समाज के एक बड़े तबके की प्रतिष्ठा से समझौता हो।
‘राहुल के विरूद्ध 10 से ज़्यादा मुकदमा पेंडिंग’
गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में बोला था कि राहुल गांधी के विरूद्ध दस से ज़्यादा मुकदमा लंबित है। राजनीति में शुद्धता वक़्त की आवश्यकता है। जनप्रतिनिधियों को बेदाग होना चाहिए। इस कम्पलेन के बाद भी राहुल गांधी के विरूद्ध दूसरी कम्पलेन दर्ज की गई। इनमें से एक कम्पलेन वीर सावरकर के पोते ने पुणे की न्यायालय मे पंजीकृत की क्योंकि आरोपी ने वीर सावरकर के विरूद्ध मानहानि करने वाला बयान दिया था। लखनऊ की न्यायालय में राहुल गांधी के विरूद्ध कम्पलेन दर्ज हुई। इन सब के मद्देनजर यदि राहुल गांधी के दोषी ठहराए जाने के निर्णय पर न्यायालय रोक नहीं लगता है तो उनके साथ कोई नाइंसाफी नहीं होगी।