पत्र में सांसदों ने अमेरिकी विदेश विभाग और सिविल सोसाइटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राष्ट्रपति बाइडेन से बोला कि वो प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से वार्ता में हिंदुस्तान में पॉलिटिकल स्पेस के कम होने, धार्मिक असहिष्णुता के बढ़ने, सिविल सोसाइटी संगठनों और पत्रकारों को निशाना बनाने, प्रेस और इंटरनेट पर बढ़ते प्रतिबंधों का मामला उठाएं.
70 से अधिक अमेरिकी सीनेटरों और प्रतिनिधियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की राजकीय यात्रा के लिए वाशिंगटन डीसी में आगमन की पूर्व संध्या पर लिखा है. बाइडेन को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हिंदुस्तान में लोकतांत्रिक मानदंडों और मानवाधिकारों के बारे में चिंताओं को उठाने के लिए बोला है. भारतवंशी सांसद प्रमिला जयपाल समेत 75 सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र में बोला गया है कि लंबे समय से भारत-अमेरिका के मजबूत संबंधों के समर्थक के रूप में हम ये भी मानते हैं कि दोस्तों को अपने मतभेदों पर निष्ठावान और साफ ढंग से चर्चा करनी चाहिए.
पत्र में बोला गया है कि हिंदुस्तान और अमेरिका नैतिकता के माध्यम से एक विशेष बंधन साझा करते हैं जिन्होंने हमारे इतिहास को आकार दिया. महात्मा गांधी और अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर क्रमशः हिंदुस्तान और अमेरिका में दोनों का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है. सांसदों ने रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में अमेरिका और हिंदुस्तान के बीच योगदान को गहरा करने के लिए अपने समर्थन पर जोर दिया और वे राष्ट्रों के बीच मजबूत”सांस्कृतिक जुड़ाव का समर्थन करते हैं. उन्होंने यह भी साफ किया कि वे हिंदुस्तान के लिए किसी विशेष सियासी दल या नेता का समर्थन नहीं करते हैं.
पत्र में सांसदों ने अमेरिकी विदेश विभाग और सिविल सोसाइटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राष्ट्रपति बाइडेन से बोला कि वो प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से वार्ता में हिंदुस्तान में पॉलिटिकल स्पेस के कम होने, धार्मिक असहिष्णुता के बढ़ने, सिविल सोसाइटी संगठनों और पत्रकारों को निशाना बनाने, प्रेस और इंटरनेट पर बढ़ते प्रतिबंधों का मामला उठाएं.