संयुक्त देश ने हिंदुस्तान द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस प्रस्ताव के अनुसार संयुक्त देश मुख्यालय में एक स्मारक दीवार बनाई जानी है. स्मारक की दीवार उन सैनिकों को श्रद्धांजलि देगी जिन्होंने संयुक्त देश शांति मिशन में अपने प्राणों की आहुति दी है. संयुक्त देश में हिंदुस्तान की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने प्रस्ताव पेश किया, जिसे 190 राष्ट्रों ने समर्थन दिया.
स्मारक की दीवार क्यों बनेगी?
संयुक्त देश ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और बोला कि न्यूयॉर्क में संयुक्त देश मुख्यालय में एक उपयुक्त और प्रमुख जगह पर स्मारक की दीवार खड़ी की जाएगी. दीवार शांति अभियानों के दौरान बलिदान देने वाले सैनिकों के सम्मान में बनाई जाएगी. संयुक्त देश में हिंदुस्तान की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने बोला कि स्मारक दीवार इस बात का प्रतीक होगी कि संयुक्त देश शांति पर इतना जोर क्यों देता है. साथ ही यह लोगों को याद दिलाएगा कि दुनिया ने उनके फैसलों की कितनी मूल्य चुकाई है.
यह प्रस्ताव 18 राष्ट्रों में पेश किया गया था
भारत का प्रस्ताव बांग्लादेश, कनाडा, चीन, डेनमार्क, मिस्र, फ्रांस, भारत, इंडोनेशिया, जॉर्डन, नेपाल, रवांडा और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित 18 राष्ट्रों द्वारा प्रस्तुत किया गया था. प्रस्ताव में बोला गया है कि इस स्मारक दीवार का निर्माण तीन वर्ष में पूरा किया जाएगा. भारत ने 2015 में संयुक्त देश में एक आभासी स्मारक दीवार का शुरुआत किया, जिसमें भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने शांति अभियानों में अपने प्राणों की आहुति दी.
पीएम मोदी ने जताई खुशी
भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त देश में एक स्मारक दीवार के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की. पीएम मोदी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए सभी राष्ट्रों को धन्यवाद दिया। जब प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा किया, तो संयुक्त देश में अपने भाषण में, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन सैनिकों की याद में एक स्मारक दीवार बनाने का सुझाव दिया, जिन्होंने शांति अभियानों के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी थी. यही वजह है कि जब हिंदुस्तान के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है तो प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर अपनी खुशी जाहिर की है।