28 मई को पीएम नरेंद्र मोदी ने नयी संसद भवन बिल्डिंग का उद्घाटन किया. इस मौके पर फिल्म इंडस्ट्री से भी काफी लोगों ने प्रतिक्रिया दी. इसमें सबसे अधिक चर्चा शाहरुख खान के रिएक्शन की हुई. शाहरुख ने नए संसद भवन को लेकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और देशवासियों को शुभकामना दी. हालांकि अब कुछ लोगों को शाहरुख का ऐसा करना रास नहीं आया है.

एनसीपी के नेता क्लाईड क्रास्टो ने ट्वीट करके शाहरुख पर तंज कसा है. उन्होंने बोला है कि शाहरुख ने नयी संसद भवन के सपोर्ट में अपनी बात कही है, इसलिए उनकी फिल्मों को अब बैन करने की मांग नहीं होगी.
महाराष्ट्र भाजपा के नेता अब शाहरुख के सामने घुटने टेकेंगे- क्लाइड क्रैस्टो
एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने लिखा, ‘अब जब शाहरुख ने नयी पार्लियामेंट बिल्डिंग को अपना सपोर्ट दे ही दिया है, तो हम देखेंगे कि महाराष्ट्र भाजपा के नेता जल्द ही उनके सामने घुटने टेकेंगे. अब उनकी फिल्मों को बैन करने की मांग भी नहीं होगी.’

‘स्पोर्ट्स पर फिल्में बनाते हैं, लेकिन रेसलर्स पर अब शब्द नहीं बोलते’
क्लाइड क्रैस्टो यहीं नहीं रुके. उन्होंने शाहरुख के साथ-साथ अक्षय कुमार को भी निशाने पर लिया. उन्होंने लिखा कि इन दोनों एक्टर्स ने पार्लियामेंट बिल्डिंग के बारे में अपने विचार रखे लेकिन पहलवानों के प्रोटेस्ट को लेकर एक शब्द नहीं कहा.
उन्होंने लिखा, ‘इन दोनों एक्टर्स ने स्पोर्ट्स पर बनी फिल्मों में काम किया है, और इससे काफी अधिक पैसे और प्रसिद्धि भी कमाई है. ऐसी कौन सी विवशता है जिससे कि वे न्याय के लिए लड़ रहे रेसलर्स को अपना सपोर्ट देने में कतरा रहे हैं. इन्हें डर किससे है?’

जाहिर है कि पिछले कुछ समय में बायकॉट ट्रेंड काफी अधिक देखने को मिला है. शाहरुख और अक्षय कुमार जैसे स्टार्स की भी फिल्में इससे अछूती नहीं रही हैं. शाहरुख की पठान और अक्षय की फिल्म रक्षाबंधन के विरूद्ध सोशल मीडिया से लेकर जमीन पर काफी अधिक हंगामा देखने को मिला था.
शाहरुख ने नए संसद भवन को लेकर क्या कहा?
पीएम मोदी ने 26 मई को नयी संसद भवन का एक वीडियो शेयर किया था. शेयर करते समय उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे इस वीडियो को अपनी आवाज दें. पीएम की अपील को मानते हुए शाहरुख ने इसे अपनी आवाज दी थी.
उन्होंने कहा- ये नया घर इतना बड़ा हो कि इसमें राष्ट्र के हर कोने के लोगों के लिए घर बन सकें. इस घर की बाहें इतनी चौड़ी हो कि राष्ट्र की हर जाति- प्रजाति और हर धर्म को प्यार कर सकें. इसकी नजर इतनी गहरी हो कि राष्ट्र के हर एक नागरिक को देख सके.
नई संसद के बारे में अपनी राय रखने पर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट के जरिए शाहरुख का आभार व्यक्त किया.
शाहरुख ने इसके अतिरिक्त एक ट्वीट भी किया. उन्होंने लिखा, ‘हमारे संविधान को बनाए रखने वाले, हमारे लोगों का अगुवाई करने वाले और राष्ट्र की विविधता की रक्षा करने वाले लोगों के लिए ये कितना बहुत बढ़िया घर है. ये भले ही एक नए हिंदुस्तान का नया संसद भवन है लेकिन ये हिंदुस्तान की सदियों पुरानी गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है.’
नई बिल्डिंग बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पुरानी संसद भवन को 96 वर्ष पहले 1927 में बनाया गया था. मार्च 2020 में गवर्नमेंट ने संसद को बताया था कि पुरानी बिल्डिंग ओवर यूटिलाइज्ड हो चुकी है और खराब हो रही है.
इसके साथ ही लोकसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन के बाद जो सीटें बढ़ेंगीं, उनके सांसदों के बैठने के लिए पुरानी बिल्डिंग में पर्याप्त स्थान नहीं है. इसी वजह से नयी बिल्डिंग बनाई गई. लोकसभा में इतनी स्थान होगी कि दोनों सदनों के जॉइंट सेशन के समय लोकसभा में ही 1272 से अधिक सांसद साथ बैठ सकेंगे.