जस्टिस बी आर गवई, विक्रम नाथ और संजय करोल की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने असम में वन्यजीव अभयारण्य के संबंध में पर्यावरण और वन मंत्रालय और राज्य गवर्नमेंट को नोटिस जारी किया है.
सुप्रीम न्यायालय ने केंद्र और असम गवर्नमेंट से उस याचिका पर उत्तर मांगा है जिसमें पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य के आसपास के क्षेत्र को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने और सभी कब्ज़ा हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है. जस्टिस बी आर गवई, विक्रम नाथ और संजय करोल की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने असम में वन्यजीव अभयारण्य के संबंध में पर्यावरण और वन मंत्रालय और राज्य गवर्नमेंट को नोटिस जारी किया है. पीठ ने बोला कि नोटिस जारी करें, 12 जुलाई, 2023 को वापस किया जा सकता है. असम राज्य के लिए स्थायी वकील की सेवा करने की स्वतंत्रता दी जाती है.
शीर्ष न्यायालय पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा पंजीकृत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बिना किसी और देरी के पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य की सीमा का परफेक्ट सीमांकन करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. याचिका में बोला गया है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अनुसार 1998 में अधिसूचित अभयारण्य की सीमा को अभी तक परफेक्ट रूप से चिह्नित नहीं किया गया है और अभयारण्य क्षेत्र के एक हिस्से, खास भूमि (सरकारी नियंत्रित भूमि) का नियंत्रण अभी तक सौंपा जाना है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऑफिसरों ने 11 दिसंबर, 2018 को उच्चतम न्यायालय के आदेश की घोर अवहेलना करते हुए अभयारण्य के आसपास के क्षेत्र को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) घोषित करने के लिए कोई कारगर तरीका नहीं किए हैं. जैसा कि विभिन्न वन ऑफिसरों के साथ-साथ मोरीगांव जिले के उपायुक्त के बीच आदान-प्रदान किए गए पत्रों की श्रृंखला से साफ है, पच्चीस वर्ष बीतने के बावजूद, पोबितोरा अभयारण्य की सीमा का भौतिक रूप से परफेक्ट रूप से सीमांकन किया जाना बाकी है.