यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ईएससी) के के अनुसार, Covid-19 के गंभीर लक्षण वाले मरीजों में उसी दौरान के हल्के लक्षण वाले मरीजों की तुलना में दिल के गंभीर रोगों का खतरा अधिक देखा गया है. दिल के ये रोग कई मरीजों के लिए जानलेवा भी साबित हुए हैं.
डॉक्टर्स बताते हैं, यह परेशानी असल में हार्ट के रिदम यानी दिल के धड़कने से संबंधित है. हार्ट के निचले कक्षों (वेंट्रिकल्स) में अनियमित विद्युत संकेतों के कारण यह रोग होती है. एक स्वस्थ दिल आमतौर पर रेस्ट के समय एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है जबकि इस रोग में धड़कन 100 से अधिक हो सकती है. इसके कारण हार्ट अटैक भी हो सकता है.
कई अध्ययनों में इस बात पर भी जोर दिया जाता रहा है कि दिल रोगों का खतरा मर्दों की तुलना में स्त्रियों में अधिक होता है.
एट्रियल फिब्रिलेशन अनियमित दिल की धड़कन की स्थिति है जिसके कारण ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ जाता है, वहीं ब्रैडीकार्डिया, दिल के धड़कनों के सामान्य से कम होने की स्थिति है. ये सभी स्थितियां गंभीर रोगों का कारण बन सकती हैं.
कुछ हल्के लक्षण वालों में भी लॉन्ग कोविड में हार्ट की समस्याएं विकसित होती देखी गई हैं. ऐसे में संक्रमण से ठीक होने के बाद एक बार एहतियातन दिल की जांच जरूर करा लें. दिल रोगों के मुद्दे किसी भी उम्र वालों में हो सकते हैं.