मध्यप्रदेश के कूनो अभ्यारण्य में अफ्रीका से चीतों के आने के बाद अब कोलंबिया से 70 हिप्पो हिंदुस्तान लाए जाएंगे. इन हिप्पो की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि इन्हें दूसरे राष्ट्रों में भेजा जा रहा है. इसी के अनुसार एक बड़ी संख्या यानी 70 कोकीन हिप्पो को हिंदुस्तान लाया जाएगा और एक अभ्यारण्य में रखा जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 70 ‘कोकीन हिप्पो‘ को स्थानांतरित करने की योजना है. इनमें से 60 हिंदुस्तान लाए जाएंगे. दरअसल, ये हिप्पो ड्रग स्मगलर पाब्लो एस्कोबार के प्राइवेट चिड़ियाघर में रहे जानवरों के वंशज हैं. इसी कारण से इन्हें कोकीन हिप्पो बोला जाता है. इन्हें स्थानांतरित करने में 35 लाख $ का खर्च आएगा. यह योजना कोलंबियाई कृषि संस्थान, कोलंबिया वायु सेना और मैक्सिको में ओस्टोक अभ्यारण्य समेत विभिन्न संस्थान के साथ क्षेत्रीय एंटीऑक्विया गवर्नमेंट की ओर से किए गए समझौते का हिस्सा है. अभ्यारण्य 10 दरियाई घोड़ों को ले जाएगा. जबकि शेष 60 को हिंदुस्तान के एक अभ्यारण्य में लाया जाएगा.
दूर दूर तक खेतों में फैल चुके हैं ये हिप्पो
पाब्लो एस्कोबार के इलाकों से होते हुए ये जानवर खेत में दूर तक फैल चुके हैं. ऑफिसरों की ओर से इनकी जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए तरह।तरह के तरीका अपनाए गए, लेकिन इसके बावजूद भी इनकी संख्या 130 से 160 हो गई है. मूल हिप्पो विदेशी जानवरों के चिड़ियाघर का हिस्सा थे. जिसे पाब्लो एस्कोबार ने 1980 के दशक में बनाया था. 1993 में उसकी मृत्यु के बाद ज्यादातर जानवरों को ऑफिसरों ने स्थानांतरित कर दिया, लेकिन परिवहन की मुश्किल के कारण उन्होंने हिप्पो को नहीं हटाया.
भारत आएंगे हिप्पो
तभी से इन हिप्पो ने तेजी से प्रजनन किया. क्षेत्रीय मैग्डेलेना नदी के बेसिन के साथ उन्होंने अपना विस्तार किया. देखते ही देखते हिप्पो क्षेत्रीय लोगों और ऑफिसरों के लिए एक पर्यावरणीय चुनौती बन गए. 10 हिप्पो मैक्सिको में भेजे जाएंगे. हिंदुस्तान के एक अभ्यारण्य में 60 हिप्पो आएंगे. इन हिप्पो को उनके मूल जगह अफ्रीका में वापस ले जाना संभव नहीं है. वहां का क्षेत्रीय पारिस्थितिकि तंत्र इन्हें परेशान कर सकता है.