संसद के दोनों सदनों में पक्ष और विपक्ष की ओर से हो रही नारेबाजी के कारण पिछले चार दिनों से कामकाज ठप है. राहुल गांधी के ‘लोकतंत्र पर हमले’ वाले बयान को राष्ट्र का अपमान बताते हुए भाजपा उनसे माफी की मांग कर रही है, वहीं सभी विपक्षी दल अडानी टकराव की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग कर रहे हैं । बृहस्पतिवार को राहुल गांधी पहली बार संसद पहुंचे और उन्होंने बोला कि यदि उन्हें अनुमति दी जाए तो वे इसपर कुछ कहना चाहेंगे । अहम बात यह है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में लोकतंत्र का गला घोंटने की बात करके और संसद में बोलने से रोकने का आरोप लगाकर भाजपा को एक बड़ा मामला दे दिया है । अब विरोधी दलों के नेताओं को लग रहा है कि राहुल के चक्कर में उनका हानि हो गया है । अडानी के नाम पर उन्होंने जो कैंपेन खड़ा किया था उसकी हवा निकलती जा रही है । इस समय हालत ये है कि दोनों पक्ष संसद और मीडिया का उपयोग एक-दूसरे पर हावी होने के लिए कर रहे हैं. दोनों जनता के सामने साबित करना चाहते हैं कि मेरी कमीज़ तुम्हारी कमीज़ से अधिक सफेद है । इस चक्कर में संसद का काम ठप पड़ा है. ये जनता के पैसे की बर्बादी है .
अदालत में व्हीलचेयर पर लालू
राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद बुधवार को ‘जमीन के बदले नौकरी’ मुद्दे में दिल्ली की एक न्यायालय में पेश हुए । वे व्हीलचेयर पर बैठकर पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती के साथ न्यायालय पहुंचे । न्यायालय ने लालू, राबड़ी और मीसा समेत सभी 15 आरोपियों को जमानत दे दी । इस मुद्दे की अगली सुनवाई 29 मार्च को होगी । लालू को जमानत की समाचार मिलते ही आरजेडी के खेमे में उत्सव का माहौल बन गया । ऐसा लग रहा था मानो लालू प्रसाद की जीत हो गई है । वैसे इस मुद्दे में लालू यादव समेत किसी भी आरोपी को CBI ने जांच के दौरान अरैस्ट नहीं किया जबकि चार्जशीट भी फाइल हो चुकी है, इसलिए न्यायालय ने इन्हें जमानत दे दी . उच्चतम न्यायालय के कई निर्णय हैं जिसमें साफ-साफ बोला गया है कि यदि जांच के दौरान गिरफ्तारी नहीं हुई हो और चार्जशीट फाइल हो चुकी हो तो कुछ कानूनों के अनुसार दर्ज हुए केसों को छोड़ कर बाकी मामलों में आरोपी को जमानत मिलनी चाहिए । इस मुकदमा का मेरिट कुछ भी हो लेकिन जिसने भी लालू को मास्क लगाए व्हील चेयर पर बैठकर न्यायालय में जाते देखा, उसकी सहानूभूति लालू के साथ होगी । सब जानते हैं कि लालू सिंगापुर के एक हॉस्पिटल से किडनी का ट्रांसप्लांट करवा कर लौटे हैं. उनका इम्युनिटी लेवल कम है. ऐसे रोगी को भीड़भाड़ में जाने से इन्फेक्शन का खतरा रहता है । इसलिए यदि लालू को न्यायालय में नहीं बुलाया गया होता तो बेहतर होता । राजनीति अपनी स्थान है लेकिन मेडिकल कंडीशन को देखते हुए लालू को ये रियायत दी जानी चाहिए थी .
महाराष्ट्र में किसान परेशान
महाराष्ट्र में एक ओर जहां पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारी पिछले तीन दिनों से अनिश्चितकालीन स्ट्राइक पर हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों किसान, आशा कार्यकर्ता और आदिवासी करीब 200 किमी लंबे मार्च पर हैं । यह मार्च डिंडोरी से प्रारम्भ हुआ और नासिक होते हुए मुंबई पहुंचेगा । ये लोग प्याज उगानेवाले किसानों के लिए प्रति क्विंटल 600 रुपये सब्सिडी, 12 घंटे लगातार बिजली आपूर्ति और कृषि लोन माफ करने की मांग कर रहे हैं । ये बात ठीक है कि महाराष्ट्र में किसानों को उनकी फसल की ठीक मूल्य नहीं मिल रही है. कुछ दिन पहले मैंने आपको ‘आज की बात’ शो में दिखाया था कि लासलगांव में एक किसान को 512 किलो प्याज के बदले केवल 2 रुपए 49 पैसे का चेक मिला जबकि बाजार में प्याज 25 रुपए किलो बिक रहा है । ये स्थिति ठीक नहीं है । हालांकि महाराष्ट्र गवर्नमेंट ने प्याज पर प्रति क्विटंल 300 रुपए की सब्सिडी दी है लेकिन ये नाकाफी है । क्योंकि किसानों का बोलना है कि एक क्विटंल प्याज उगाने पर करीब 12 सौ रुपए का खर्चा आता है । इसी तरह आलू, टमाटर और लहसुन उगाने वाले किसान भी परेशान हैं । इसलिए गवर्नमेंट को इस तरफ ध्यान देना चाहिए । पिछले एक महीने से अधिक समय से किसान विभिन्न मंचों से अपनी बात उठा रहे थे. यदि एकनाथ शिन्दे की गवर्नमेंट पहले ही किसानों से बात करती और कोई रास्ता निकालती तो किसानों को सड़क पर आने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती । लेकिन लगता है कि एकनाथ शिंदे का अधिक ध्यान अभी भी उद्धव ठाकरे की सेना को तोड़ने में लगा है । वे रोज किसी ना किसी लीडर को अपनी पार्टी में शामिल कराते हैं और इस उपलब्धि पर खुश होते रहते हैं । लेकिन इस चक्कर में हानि जनता का हो रहा है.