ग्वालियर, 1 अप्रैल. पीएम मोदी की गवर्नमेंट गरीब और पिछड़े वर्ग के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है. इनमें से पीएम विश्वकर्मा योजना उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो अपने पारंपरिक कार्यों के जरिए आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं. इस योजना के अनुसार मध्य प्रदेश गवर्नमेंट ने हजारों जरूरतमंद परिवारों को लाखों रुपये का कर्ज स्वीकृत किया है, जिससे वे अपने रोजगार को मजबूती दे सकें और एक खुशहाल जीवन जी सकें
.ग्वालियर जिले में भी इस योजना के अनुसार सैकड़ों लाभार्थियों को सहायता दी गई है. यह योजना खासकर उन लोगों के लिए मददगार साबित हो रही है, जो गरीब और पिछड़े वर्ग से आते हैं और अपने परिवार का ठीक से भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं थे. लेकिन अब हालात बदल गए हैं, क्योंकि इस योजना का फायदा उठाकर ये लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अनुसार कर्ज प्राप्त करने वाले ग्वालियर के अभिषेक अग्रवाल ने इस योजना का फायदा उठाकर अपनी किस्मत बदल ली. उन्होंने बताया, मैंने आरंभ में केवल 10,000 रुपये का लोन लिया था, जिससे मैंने कपड़े का व्यापार प्रारम्भ किया. धीरे-धीरे मेरा व्यापार बढ़ता गया और अब यह बड़े स्तर पर पहुंच चुका है. लोन की राशि भी समय के साथ बढ़ती गई और आज मुझे अपने परिवार के पालन-पोषण में कोई परेशानी नहीं होती. इस योजना ने मुझे रोजगार का नया अवसर दिया और अब मैं आत्मनिर्भर बन चुका हूं.अभिषेक अग्रवाल की तरह, कई अन्य लोग भी इस योजना का फायदा लेकर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं.
इसी योजना के एक और लाभ पाने वाले नितिन गुप्ता ने पीएम मोदी और उनकी गवर्नमेंट का आभार जताते हुए कहा, पहले मैं बेरोजगार था और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ था, लेकिन जब मुझे पीएम विश्वकर्मा योजना के अनुसार कर्ज मिला, तो मैंने ग्वालियर के महाराज बाड़े पर बड़े व्यापारियों के साथ मिलकर अपना स्वयं का व्यापार प्रारम्भ किया. इस कर्ज ने मेरी पूरी जीवन बदल दी. आज मैं अच्छी कमाई कर रहा हूं और अपने परिवार को एक अच्छा जीवन देने में सक्षम हूं.
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाना है. इस योजना के अनुसार बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, जूता-चप्पल निर्माता, बुनकर, राजमिस्त्री, मूर्तिकार और अन्य पारंपरिक कार्य करने वाले लोगों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरणों की सुविधा दी जाती है, जिससे वे अपने काम को बेहतर बना सकें.