बदरीनाथ धाम से तीन किलोमीटर दूर भारत—चीन सीमा पर माणा गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम ने बोला कि केदारनाथ, बदरीनाथ एवं हेमकुंड साहिब को भी सुविधाओं से जोडा जा रहा है. उन्होंने कहा, अयोध्या में इतना भव्य राममंदिर बन रहा है और देवी विंध्याचंल के कॉरिडोर तक हिंदुस्तान अपने सांस्कृतिक उत्थान का आहवान कर रहा है.
देहरादून. पीएम मोदी ने शुक्रवार को बोला कि गुलामी की मानसिकता के कारण दशकों तक घोर उपेक्षा का शिकार रहे काशी, उज्जैन, अयोध्या और अन्य अनगिनत श्रद्धा के केंद्र अपने गौरव को पुन: प्राप्त कर रहे हैं. बदरीनाथ धाम से तीन किलोमीटर दूर भारत—चीन सीमा पर माणा गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम ने बोला कि केदारनाथ, बदरीनाथ एवं हेमकुंड साहिब को भी सुविधाओं से जोडा जा रहा है. उन्होंने कहा, अयोध्या में इतना भव्य राममंदिर बन रहा है और देवी विंध्याचंल के कॉरिडोर तक हिंदुस्तान अपने सांस्कृतिक उत्थान का आहवान कर रहा है. आस्था के इन केंद्रों तक पहुंचना अब हर श्रद्धालु के लिए आसान और सुगम हो रहा है. उन्होंने बोला कि आजादी के बाद भी राष्ट्र को गुलामी की मानसिकता ने जकडे रखा था और पिछली सरकारों ने अपनी संस्कृति को लेकर हीन भावना होने के चलते अपने आस्था स्थलों का विकास नहीं किया. उन्होंने कहा, गुलामी की मानसिकता ने हमारे आस्था के स्थलों को जर्जर स्थिति में ला दिया. सैकडों सालों से मौसम की मार सहते आ रहे पत्थर तथा वहां जाने के रास्ते तक तबाह हो गए. लेकिन उन सरकारों को अपने नागरिकों को इन स्थलों तक जाने की सुविधाएं देना तक महत्वपूर्ण नहीं लगा.
इससे पहले, पीएम ने 12.40 किलोमीटर लंबे गोविंदघाट—हेमकुंड साहिब रज्जूमार्ग (रोपवे), 9.7 किमी लंबे गौरीकुंड—केदारनाथ रज्जूमार्ग सहित कुल 3400 करोड रूपये की सडक और रज्जूमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया. मोदी ने बोला कि घोर उपेक्षा के बावजूद ‘‘न तो हमारे आध्यात्मिक केंद्रों का महत्व कम हुआ और न ही उनके प्रति हमारे सरेंडर में कमी आयी.’’ उन्होंने बोला कि बडे—बुजुर्गों के अतिरिक्त नौजवान पीढी के लिए भी इन्हें श्रद्धा का केंद्र बनाने का कोशिश होना चाहिए. पीएम ने बोला कि आज पूरा राष्ट्र अपने आध्यात्मिक केंद्रों के विकास को लेकर गर्व से भर गया है और उत्तराखंड में डबल इंजन की गवर्नमेंट बनने के बाद चारधाम में अब तक 45 लाख श्रद्धालु आए हैं. उन्होंने बोला कि आस्था और आध्यात्म स्थलों के पुनर्निर्माण से रोजगार और लोगों के जीवन के सुविधा समापन होने का पक्ष भी जुडा है. उन्होंने कहा, जब पहाड पर रेल, रोड और रोपवे पहुंचते हैं तो अपने साथ रोजगार भी लाते हैं और जीवन को जानदार, बहुत बढ़िया और आसान बना देते हैं. उन्होंने बोला कि गवर्नमेंट अब ड्रोन के माध्यम से पहाडों पर सामान पहुंचाने पर काम कर रही है. उन्होंने बोला कि ड्रोन पहाडों में पैदा होने वाली ताजा सब्जी जल्द बडे शहरों में पहुंचा देगी जिससे क्षेत्रीय लोगों की कमाई भी बढेगी. पहाड में काम करने वाले स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित नमक, मसाले तथा अन्य वस्तुओं की गुणवत्ता और पैकेजिंग की प्रशंसा करते हुए पीएम ने यहां आने वाले हर तीर्थयात्री से यहां का सामान खरीद कर साथ ले जाने का आग्रह किया. मोदी ने बोला कि वह चीन सीमा के नजदीक बसे माणा गांव से राष्ट्र के 130 करोड देशवासियों से प्रार्थना करते हैं कि अपनी यात्रा पर होने वाले खर्च में से कम से कम पांच फीसदी धन वह क्षेत्रीय उत्पादों को खरीदने में करें. इस अभियान को वोकल फॉर लोकल की तरह चलाने का आग्रह करते हुए पीएम ने कहा, यदि कोई उत्पाद आपके घर में है तो भी दूसरा लेकर जाइए. किसी को भेंट दे दीजिए, लेकिन लेकर जरूर जाइए. उन्होंने बोला कि इससे आपको संतोष और आनंद मिलेगा और क्षेत्र के लोगों को रोज—रोटी मिल जाएगी. उन्होंने बोला कि माणा की एक क्षेत्रीय स्त्री ने उन्हें बताया कि इस बार यात्रा के अच्छा होने से उनका ढाई लाख रूपये का सामान बिक गया. पीएम ने पहाड के लोगों के मेहनती होने को उनकी ताकत बताया लेकिन बोला कि पिछली सरकारों ने उनकी इस ताकत को उनके विरूद्ध ही उपयोग किया और उन्हें कोई सुविधा नहीं दी. मोदी ने बोला कि लेकिन उन्होंने पहाड की चुनौतियों का हल निकालने का कोशिश किया और हर गांव तक बिजली, पानी सहित हर मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई. प्रदेश के कोने—कोने में डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाई. उन्होंने बोला कि वह संसद के अपने कुछ मित्रों को बताना चाहते हैं कि माणा गांव में भी आठवीं कक्षा तक पढी महिलाएं भी डिजिटल पेमेंट ले रही हैं. उन्होंने बोला कि डबल इंजन की गवर्नमेंट प्रदेश में युवाओं को कौशल विकास के लिए आर्थिक सहायता दे रही है तथा जल्द ही उनके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में एनसीसी का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है. पहाडों की संपर्क की परेशानी को दूर करने के लिए भी उनकी डबल इंजन की गवर्नमेंट उत्तराखंड को मल्टीमोडल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए हर साधन—रेल, सडक और हवाई—पर काम किया जा रहा है. इस संबंध में हिमाचल वंदे हिंदुस्तान रेलगाडी का जिक्र करते हुए उन्होंने बोला कि उत्तराखंड में भी ऋषिकेश—कर्णप्रयाग रेल का सपना जल्द साकार होगा. उन्होंने बोला कि संपर्क अच्छा होने से दूरी कम होने के साथ ही उद्योगों को भी बढावा मिलेगा. इस संबंध में उन्होंने बोला कि 2014 के बाद से सीमा सडक संगठन ने राष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में 7000 किलोमीटर नयी सडकों तथा सैकडों पुलों का निर्माण किया है. उन्होंने बोला कि पहाडी राज्यों की कनेक्टिविटी को बढाने के लिए अब सागरमाला और भारतमाला की तर्ज पर पर्वतमाला का काम आगे बढाया जाएगा. इसके अनुसार उत्तराखंड और हिमाचल में रज्जूमार्गों का एक बडा नेटवर्क बनना प्रारम्भ हो चुका है. सीमावर्ती गांवों के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने बोला कि उनमें चहल—पहल बढनी चाहिए और ऐसे गांव बनने चाहिए जिससे उन्हें छोडकर जा चुके लोगों का मन भी वहां लौटने को करे. आने वाले दशक को उत्तराखंड का बताते हुए पीएम ने फिर दोहराया कि उसकी आशा और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उनकी मेहनत कम नहीं होगी. उन्होंने बोला कि इस जनविश्वास पर खरा उतरने के लिए वह बाबा केदारनाथ और बदरीनाथ का आशीर्वाद लेने यहां आए थे