लोकसभा चुनाव का तीसरे दौर का मतदान मंगलवार को होना है। लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। सूरत, इंदौर और पुरी से कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी के चुनाव लड़ने से मना करने के बाद पार्टी को दिल्ली में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन किया है और इस गठबंधन को लेकर क्षेत्रीय पार्टी इकाई में पहले से ही असंतोष था। रही-सही कसर पार्टी उम्मीदवारों के चयन ने पूरी कर दी। गठबंधन के अनुसार दिल्ली में कांग्रेस पार्टी तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन तीन सीटों पर कन्हैया कुमार और उदित राज को प्रत्याशी बनाये जाने के बाद दिल्ली कांग्रेस पार्टी में बगावत हो गयी। प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने आप के साथ गठबंधन और बाहरी लोगों को प्रत्याशी बनाए जाने के विरुद्ध अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र दे दिया। लवली के इस्तीफे के बाद दिल्ली कांग्रेस पार्टी की कलह सतह पर आ गयी है और कई अन्य नेताओं ने भी पार्टी से त्याग-पत्र दिया। लवली के इस कदम के बाद पार्टी के कई नेताओं ने उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की और आखिरकार लवली और अन्य नेताओं ने शनिवार को बीजेपी का दामन थाम लिया।
लवली और अन्य नेताओं के कांग्रेस पार्टी छोड़ने का क्या होगा नुकसान
शीला दीक्षित की गवर्नमेंट में अरविंदर सिंह लवली, राजकुमार चौहान दिल्ली गवर्नमेंट में कई वर्षों तक मंत्री पद पर योग्य रहे। जबकि नसीब सिंह, नीरज बसोया तीन बार लगातार विधानसभा का चुनाव जीतने में सफल रहे। इन नेताओं की कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है और जमीनी स्तर पर जुड़े हुए है। लोकसभा चुनाव से पहले इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का आत्मशक्ति गिरेगा और पार्टी को लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा उठाना होगा। यही नहीं दिल्ली में सिख मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है और लवली के कांग्रेस पार्टी छोड़ने से सिख मतदाताओं में अच्छा संदेश नहीं जायेगा। मौजूदा समय में दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के पास लवली के कद का कोई सिख नेता नहीं है।
आप और कांग्रेस पार्टी के बीच जमीनी स्तर पर बढ़ सकता है टकराव
कांग्रेस की शीला दीक्षित गवर्नमेंट पर करप्शन का इल्जाम लगाकर ही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई। मौजूदा समय में शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी गवर्नमेंट घिरी हुई है। सीएम अरविंद केजरीवाल कारावास में है, जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन भी कारावास में हैं। शराब घोटाले को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार दिल्ली गवर्नमेंट के विरुद्ध आक्रामक रूख अपनाती रही। लेकिन चुनाव से ऐन पहले दोनों दलों के बीच गठबंधन से कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं गया। पार्टी के कई नेता दबी जुबान में गठबंधन के विरुद्ध हैं। अभी तक दोनों दलों के बीच साझा चुनावी अभियान की आरंभ नहीं हो पायी है। लवली और अन्य नेताओं के इस्तीफे के बाद जमीनी स्तर पर आप और कांग्रेस पार्टी के बीच विवाद बढ़ने की संभावना से मना नहीं किया जा सकता है।